जम्मू, सांबा और कठुआ में पैदा होने वाले बासमती-370 को अब देश के बाहर भी भेजा जाएगा। इससे बासमती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। इसके लिए कृषि विभाग किसानों को ई-मंडियों से जोड़ेगा। ई-मंडियों के माध्यम से बासमती को विदेशों तक पहुंचाया जाएगा और किसानों को उनकी फसल के उचित दाम मिलेंगे।
जम्मू-कश्मीरः अपनी सुगंध और स्वाद से दुनिया को आकर्षित करेगा बासमती-370, मालामाल होंगे किसान
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इससे पहले किसानों को बासमती को स्थानीय बाजार में ही बेचना पड़ता था। इस कारण बासमती के दाम उम्मीद से कम मिलते थे। किसानों के संपर्क भी सीमित होने के कारण वह फसल के अच्छे दाम हासिल करने में नाकाम रहते थे। कृषि विभाग इस बार ई मंडियों की सुविधा किसानों को देगा।
ई मंडियों से जुड़ने से किसानों की फसल को खेत से ही खरीद लिया जाएगा और बासमती की कीमत ऑनलाइन उनके खाते में जमा हो जाएगी। ई मंडियों में बासमती के दाम 150 रुपये प्रति किलो के करीब मिलेंगे। हालांकि हर साल बासमती को 90 रुपये किलो के हिसाब से किसान बेचते हैं। इस बार 60 रुपये ज्यादा किसानों को मिलेंगे।
जम्मू, सांबा और कठुआ में बासमती-370 की पैदावार हजारों किसान करते हैं। यहां पर लगभग 50 हजार क्विंटल पैदावार बासमती की होती है। इसमें 45 हजार क्विंटल बासमती को किसान हर साल बेचते हैं।
बासमती को ई-मंडियों के माध्यम से इस बार बेचा जाएगा। इससे किसानों को बासमती के अच्छे दाम मिल सकेंगे। साथ ही विदेशों में भी बासमती को बेचा जा सकेगा। इस पर काम शुरू हो गया है। -फारुख अहमद, मुख्य कृषि अधिकारी जम्मू