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सेना की पहल, आम लोगों के लिए खुल सकता है सियाचिन, तापमान रहता है -30 डिग्री से भी कम
Tue, 24 Sep 2019 11:55 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 24 Sep 2019 11:55 PM IST
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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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एडवेंचर टूरिज्म के शौकीन पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है। असल में भारतीय सेना जल्द ही आम लोगों के लिए दुनिया के सबसे ऊंचे क्षेत्रों में से एक सियाचिन को पयर्टन के लिहाज से खोल सकती है। एडवेंचर टूरिज्म के लिए हमेशा तैयार रहने वाले लोग भी अब उन परिस्थतियों को महसूस कर सकेंगे जो हमारे जवान देश की सीमाओं की रक्षा करते समय करते हैं। सेना प्रमुख बिपिन रावत ने हाल ही में अपने दौरे के दौरान इस पर विचार किया है।
सियाचिन
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
लद्दाख अब केंद्र शासित प्रदेश घोषित हो चुका है, जिसके चलते अब उसका प्रशासन सीधे तौर पर केंद्र सरकार के अधीन आ गया है। सेना अब ऐसे कदम उठा रही है जिसका मकसद आम लोगों को अपने जवानों के जीवन से जोड़ना और इस बात का अहसास दिलाना है कि आखिर हमारी सेना कैसे इन कठिन परिस्थितियों में सियाचिन में दुश्मनों पर नजर रखती है।
सियाचिन
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
जानकारी के अनुसार, हाल ही में सेना प्रमुख बिपिन रावत ने सियाचीन दौरे के दौरान इस तरह के प्रस्ताव को सामने लाया गया। खुद सेना प्रमुख ने इस मामले में दिलचस्पी दिखाई है। उनका मानना है कि आम लोग सेना से जुड़ना चाहते हैं और उनके बारे में जानना चाहते हैं। हाल में उन्होंने एक सेमिनार में कहा कि सेना की तरफ से आम लोगों को प्रशिक्षण संस्थान में आने दिया जा रहा है और अब विचार किया जा रहा है कि लोगों को सेना के पोस्टों तक लाया जाए।
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सियाचिन
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
आपको बता दें कि अभी सियाचिन ग्लेशियर के आसपास स्थानीय लोगों को छोड़कर किसी भी बाहरी व्यक्ति को आने की इजाजत नहीं है। ऐसे में सेना प्रमुख इस इलाके में कुछ पर्यटकों को लाने के इच्छुक हैं। हालांकि अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव मात्र है। लेकिन आने वाले समय में ही यह साफ हो पाएगा कि ऐसा किया जाएगा या नहीं।
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सियाचिन
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
असल में सियाचिन पर बने सेना के बेसकैंप की ऊंचाई 16 से 20 हजार फीट है, यहां का दौरा करने वाले नेता और अन्य अधिकारी करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर बने कैंप में रहते हैं। यहां एक बड़ा खतरा यह भी है कि तापमान -30 डिग्री तक रहता है। इतना ही नहीं यहां हिमस्खलन भी एक बड़ी चुनौती है।