श्रीनगर में ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर में सोमवार को छड़ी मुबारक का पूजन हुआ। इस दौरान प्राचीन मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पूजा की गई। कोरोना संक्रमण के प्रसार से बिगड़े हालात के कारण इस दौरान मंदिर में सामूहिक पूजन नहीं हो पाया। संभवतः तीन अगस्त को बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए छड़ी मुबारक को श्रीनगर से हेलीकॉप्टर से ही पवित्र गुफा तक ले जाया जाएगा। उधर, प्रदेश में सोमवती अमावस्या उमंग के साथ मनाई गई। हालांकि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण लोगों को मंदिरों में पूजा करने की अनुमति नहीं मिली। ऐसे में लोगों ने घरों में रहकर ही पूजा की।
तस्वीरेंः ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर में हुआ छड़ी मुबारक पूजन, घर बैठे कीजिए भोलेनाथ के दर्शन
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छड़ी मुबारक यात्रा में सीमित संत ही शामिल होंगे, क्योंकि पारंपरिक पहलगाम ट्रैक को इस साल कोविड संकट के चलते क्लीयर नहीं किया गया है। उधर, अमरनाथ यात्रा को लेकर संशय बरकरार है। प्रशासनिक स्तर पर यात्रा को 21 जुलाई को शुरू करना प्रस्तावित है। लेकिन अभी तक यात्रा की तिथि घोषित नहीं की गई है।
छड़ी मुबारक स्वामी अमरनाथ के महंत दीपेंद्र गिरी ने बताया कि श्रीनगर में कोरोना संकट के कारण दोबारा लॉकडाउन लगाना पड़ा है। धार्मिक स्थलों में सामूहिक गतिविधियां बंद हैं, जिससे छड़ी मुबारक की सामूहिक पूजा करना संभव नहीं है। वैसे धार्मिक स्थलों में दैनिक गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट में इंसानी जानों को बचाने के लिए सभी एहतियात बरतना जरूरी है।
तय शेड्यूल के मुताबिक आज छड़ी मुबारक को ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर से निकाला गया। मंगलवार को शारिका भवानी मंदिर में अनुष्ठान होगा। 23 जुलाई को श्री अमरेश्वर मंदिर श्रीनगर में छड़ी स्थापना के बाद 25 जुलाई को नागपंचमी पर दशनामी अखाड़ा, श्रीनगर में छड़ी पूजन किया जाना है।
इसके बाद 3 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा पर छड़ी मुबारक को पवित्र हिमलिंग के दर्शन करने हैं। दर्शन से पहले छड़ी मुबारक को श्रीनगर के सभी ऐतिहासिक मंदिरों का भ्रमण करना है, लेकिन मौजूदा कोरोना संकट के चलते ऐसा संभव नहीं है।
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