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आखिर अटल ही क्यों सुलझा सकते थे कश्मीर की विषम समस्या, 7 वजहें
Tue, 07 Feb 2017 07:18 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
Updated Tue, 07 Feb 2017 07:18 PM IST
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ATAL BIHARI VAJPAYEE
- फोटो : file photo
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कश्मीर की समस्या का समाधान करने के लिए आजकल तमाम सियासी पार्टियां कोई ना कोई फार्मूला सुझाती आई हैं लेकिन असल मामले में अगर गौर करें तो कश्मीर को समझने का जो नजरिया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी में था वो शायद आज तक किसी अन्य राजनेता मे नही दिखता। एक ओर जहां जम्मू-कश्मीर समेत सारे देश में अनुच्छेद 370 पर सियासी रार जारी है ऐसे में ये सवाल जरूर है कि क्या अटल जी के नजरिए से ही 370 समेत कश्मीर के तमाम विषम सवाल सुलझ सकते थे? 7 वजहें जो बताएंगी कि आखिर अटल ही क्यों सुलझा सकते थे कश्मीर की विषम समस्या?
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अटल बिहारी वाजपेई
- फोटो : amar ujala
कुछ महीनों पहले एक समारोह के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि अगर अटल कुछ और साल पीएम रह जाते तो शायद कश्मीर के मुद्दे का हल हो जाता।
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ATAL BIHARI VAJPAYEE
- फोटो : File Photo
दरअसल अटल जी कश्मीर की समस्या का हल एक मध्यस्थ फार्मूले के आधार पर पूरा करना चाहते थे। कश्मीर का विवाद किस तरह से हल हो इसके लिए अटल जी ने तीन प्वाइंट की सोच को विकसित करने का एक फार्मूला भी बताया था।
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अटल बिहारी वाजपेई
- फोटो : amar ujala
अटल जी का मत था कि कश्मीर के विवाद को जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत के आधार पर सुलझा दिया जाए। खास बात ये भी थी कि अटल जी ने इस आशय के लिए अलगाववादी नेताओं से भी बातचीत की शुरूआत कराई थी। अटल जी चाहते थे कि सरहदों पर शांति हो इस कारण उन्होंने क्रास एलओसी ट्रेड जैसे कई द्विपक्षीय कदमों की शुरूआत की। इसके साथ ही कश्मीर में लोगों के लिए कई बड़े कदम भी उठाए गए जिससे कि कश्मीर की आवाम का सरकार पर भरोसा कायम कराया जा सके।
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अटल बिहारी वाजपेई
- फोटो : amar ujala
इसमें पाकिस्तान को जाने वाली कारवां-ए-अमन बस सेवा की शुरूआत समेत कई बड़े कदम शामिल थे। अटल जी की स्वीकार्यता का पर्याय आज भी ये है कि जब भी कश्मीर के विवाद की बात आती है घाटी के तमाम सियासी दल अटल जी के फार्मूले को अपनाने की दुहाई और नसीहत देते मिल जाते हैं।
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