हैंड ग्रेनेड जिसे हथगोला भी कहते हैं। यह बारूद आधारित एक हथियार है जो फेंकने के थोड़ी देर बाद तेज धमाके के साथ फटता है। वैसे तो हथगोला फेंकने का काम दक्ष सैनिक या सैनिक-टोली का होता है। लेकिन वर्तमान समय में विशेष रूप से डिजाइन किये गए ग्रेनेड-लांचर से भी हथगोले फेंके जाते हैं। इसका ऊपरी हिस्सा (खोल) काफी सख्त होता है जो किसी सख्त चीज जैसे कि जैसे दीवार, फर्श आदि से टकराकर तेज धमाके के साथ फटता है।
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हैंड ग्रेनेड
- फोटो : अमर उजाला
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में एक बच्चा घर से सुबह स्कूल जा रहा था, इस दौरान उसे रास्ते में गेंदनुमा चीज नजर आई। वह उसे लेकर क्लास में पहुंच गया। क्लास में बच्चे ने जब वह गेंद नुमा चीज अपने अध्यापक को दिखाई तो उनके होश उड़ गए। वह गेंद नुमा चीज एक हैंड ग्रेनेड था। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।
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हैंड ग्रेनेड
- फोटो : अमर उजाला
मौके पर पहुंची पुलिस की जांच टीम ने बताया की यह हैंड ग्रेनेड 50 साल पुराना है। पुलिस ने हैंड ग्रेनेड को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यह हैंड ग्रेनेड देश में ही निर्मित है। साथ ही यह 50 वर्ष पुराना है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि किसी सैन्य कार्रवाई के दौरान ग्रेनेड गिरकर मिट्टी व पत्थरों के नीचे दब गया होगा। जोकि बच्चे को स्कूल आते वक्त मिल गया। पुलिस ने ग्रेनेड को कब्जे में लेकर पुलिस पहुंचाया है।
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आरिफ अहमद डार
- फोटो : अमर उजाला, फाइल
वहीं 30 दिसंबर 2018 को जम्मू-कश्मीर में पुलवामा जिले के गदौरा इलाके में एक रहस्यमय विस्फोट में गंभीर रूप से घायल एक 10 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। बच्चे ने श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में दम तोड़ दिया था। एसएसपी पुलवामा चंदन कोहली ने बताया कि गडौरा के एक बाग में कुछ विस्फोटक सामग्री के साथ गिरने के बाद लड़का घायल हो गया था। घटना तब हुई जब लारो निवासी अब्दुल गनी डार के पुत्र आरिफ अहमद डार खेत में जानवरों को चराने गया था।
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हैंड ग्रेनेड
- फोटो : अमर उजाला
बताया जाता है कि बच्चे को एक ग्रेनेड पड़ा मिला था जिससे वह खेलने लगा। जिसके बाद वह ग्रेनेड उसके हाथ में ही फट गया। जिसके बाद इलाज के दौरान उस बच्चे की मौत हो गई।