जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को मार गिराने के लिए सफल ऑपरेशन को अंजाम देने को एनएसजी की तरह जम्मू-कश्मीर पुलिस जवानों को ट्रेनिंग दिए जाने पर बल दिया गया है। राज्यपाल के सलाहकार के. विजय कुमार ने कमांडो ट्रेनिंग सेंटर पुलवामा के लठपोरा में दौरे के दौरान प्रशिक्षुओं और प्रशिक्षकों से मुलाकात की।
तस्वीरों में देखिए, जम्मू-कश्मीर पुलिस को आतंकवादियों से लड़ने के लिए मिलेगी यह खास ट्रेनिंग
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हाईटेक उपकरणों और हथियार से जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान होंगे लैस
इसके लिए आर्मी, पैरा मिलिट्री या पुलिस में होना जरूरी है। आर्मी से 3 और पैरा मिलिट्री से 5 साल के लिए जवान कमांडो ट्रेनिंग के लिए आते हैं।
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फिजिकल ट्रेनिंग: इसके लिए उम्र 35 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सबसे पहले फिजिकल और मेंटल टेस्ट होता है। 12 सप्ताह तक चलने वाली ये देश की सबसे कठिन ट्रेनिंग होती है। शुरुआत में जवानों में 30-40 प्रतिशत फिटनेस योग्यता होती है, जो ट्रेनिंग खत्म होने तक 80-90 प्रतिशत तक हो जाती है।
जिग जैग रन: किसी भी मुश्किल को देखते ही फौरन एक्शन लिया जा सके, इसके लिए जिग जैग रन की ट्रेनिंग दी जाती है।
लॉग एक्सरसाइज: जिस्म के ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाने के लिए ये एक्सरसाइज करवाते हैं, जिसमें हाथ सबसे खास होते हैं।
60 मीटर की स्प्रिंग दौड़- इस दौड़ के लिए सिर्फ 11 से 13 सेकेंड का वक्त दिया जाता है।
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मंकी क्रॉल: एक बंदर की तरह रस्सी के सहारे एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना भी कमांडोज की ट्रेनिंग का जरूरी हिस्सा है।
इनक्लाइंड पुश अप्स: इसके बाद बारी आती है इनक्लाइंड पुश अप्स करने की।
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गड्ढा फांदना: 9 फुट के गड्ढे को फांदने से बढ़ता है कमांडोज का कॉन्फिडेंस।
दो तरह की दौड़: एक तो 25 मिनट में 5 किलोमीटर और दूसरी 9 मिनट में 2.5 किलोमीटर की दौड़ लगवाई जाती है।