सरकारी स्कूलों के नाम से आपके मन में जो छवि बनती है, उससे बिलकुल उलट एक सरकारी स्कूल एक शानदार मिसाल कायम कर रहा है। राजस्थान का ये सरकारी स्कूल छुट्टी के दिन भी बंद नहीं होता। पिछले दो साल से यहां हर रोज पढ़ाई होती है। पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका ये सरकारी स्कूल राजस्थान के अलवर जिले में स्थित कोटकासिम के पास ही ऊजौली गांव में है। इसका नाम शहीद बलवंतसिंह राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय है। स्कूल के शिक्षकों ने अपनी मेहनत के जरिये आज सरकारी स्कूल की परिभाषा को बदलकर रख दिया है।
टीचर-स्टूडेंट की एेसी मेहनत कि मैरिट में आते हैं बच्चे
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शहीद बलवंतसिंह राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय
हकीकत ये है कि स्कूल के शिक्षकों की मेहनत के चलते यहां मैरिट में स्टूडेंट अपना स्थान बना रहे हैं। इसका कारण है कि यहां पिछले दो साल से नियमित पढ़ाई होना। किसी भी तीज-त्यौंहार पर यहां शिक्षक अवकाश पर नहीं रहते, बल्कि एक्सट्रा क्लास लगाकर छात्र-छात्राओं को पढ़ाते हैं।
कुछ ऐसा है रिकॉर्ड, खुद बोलते हैं आंकड़े
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शहीद बलवंतसिंह राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय
इसका परिणाम है कि यहां की छात्रा रितिका ने 10वीं बोर्ड एग्जाम की राज्य स्तरीय मेरिट में 96.5 प्रतिशत अंकों के साथ अपनी जगह बनाई। साथ ही, 2016-17 में 10वीं बोर्ड परीक्षा में आधे से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने 70 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। वर्तमान में इस विद्यालय में 260 बच्चों का नामांकन है।
गर्मी और सर्दी की भी नहीं रहती छुट्टी
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शहीद बलवंतसिंह राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय
ऊजौली गांव में वर्ष 1932 में ये सरकारी विद्यालय शुरू हुआ और 1978 में इसे मिडिल तक किया गया। इसके बाद 2008-09 में ये विद्यालय माध्यमिक हो गया। अब इसे उच्च माध्यमिक विद्यलाय का दर्जा मिल गया है। इसके पीछे यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों का अहम योगदान रहा। जिन्होंने अपनी छुट्टियों का उपयोग भी बच्चों को पढ़ाने में किया और अभी भी कर रहे हैं।
इन्होनें की पहल और बन गई मिसाल
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शहीद बलवंतसिंह राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय
जानकारी के अनुसार, गणित के शिक्षक निहाल सिंह राणा और अन्य शिक्षकों ने यहां छुट्टी के दिन भी पढ़ाने की पहल की। राणा ने 2013 में यह पहल की। शिक्षक जितेन्द्र यादव और अन्य ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। जितेन्द्र यादव ने बताया कि वे अपनी हर सरकारी छुट्टी का उपयोग बच्चों को पढ़ाने में कर रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षक वीरसिंह, राजपाल यादव, विजय यादव, धर्मेन्द्र वशिष्ठ, देवेन्द्र यादव सहित अन्य लोग भी उनका इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं।