पहाड़ों में हुई लगातार मूसलाधार बारिश से रविवार देर रात से यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया। हथिनीकुंड बैराज में जलस्तर बढ़कर 2,96,912 क्यूसेक पर पहुंच गया। बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं, जिससे यमुना नदी में उफान आ गया। हालांकि सोमवार दोपहर तक यमुनानगर क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर कम हो गया। लेकिन बैराज से छोड़ा गया पानी करीब 72 घंटे में दिल्ली पहुंच जाएगा।
सोमवार दोपहर दो बजे बैराज में पानी का जलस्तर दो लाख 4,414 क्यूसेक रह गया था। पहाड़ों में बारिश कम होने से नदी का जलस्तर भी घटता जाएगा। बैराज से छोड़ा गया पानी हरियाणा के यमुनानगर जिले के जठलाना क्षेत्र के यमुना नदी से सटे गांव संधाला, संधाली, गुमथला, जठलाना, लाल छप्पर, उन्हेड़ी के खेतों में घुस गया। धान की फसल से लहलहा रहे खेत जलमग्न हो गए। जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। यमुना से लगते खेतों में कटाव होने लगा। धान व गन्ने की फसल कटाव होने से नदी के पानी में बह गई।
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उफान पर यमुना नदी।
- फोटो : संवाद
हथिनीकुंड बैराज कार्यालय के अनुसार रविवार रात 11 बजे के बाद यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। 12 बजे बैराज पर दो लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। उसके बाद सुबह पांच बजे 2,95,912 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। सुबह आठ बजे जलस्तर घटने पर पानी दो लाख 57,947 क्यूसेक पर आ गया।
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उफान पर यमुना नदी।
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जलस्तर में दो बजे के बाद 60 हजार क्यूसेक पानी की कमी आई। सिंचाई विभाग की तरफ से बैराज में 70,000 क्यूसेक पानी आते ही अलर्ट जारी कर दिया जाता है। हथिनीकुंड बैराज पर बने सभी गेटों को खोल दिया गया। बारिश के पानी में काफी मात्रा में सिल्ट, लकड़ी, पत्थर बह कर आते हैं इसलिए पश्चिमी यमुना नहर व उत्तर प्रदेश जाने वाली पूर्व यमुना नहर को बंद कर दिया गया। अब सारा पानी यमुना में छोड़ा जा रहा है। बैराज से छोड़ा गया पानी करीब 72 घंटे में दिल्ली पहुंचेगा।
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उफान पर यमुना नदी। जलमग्न हुई फसलें।
- फोटो : संवाद
पानी आते ही लोगों को किया अलर्ट
सिंचाई विभाग के एसडीओ धर्मपाल ने बताया कि हथिनीकुंड बैराज पर पानी के बढ़ने के साथ ही जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस व तहसीलदार को सूचित कर दिया गया। वहीं सोशल मीडिया पर बने ग्रुप में भी अलर्ट किया गया। बैराज पर लगे टोल फ्री नंबर पर भी फोन कर जानकारी जुटाई जा सकती है।
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उफान पर यमुना नदी। जलमग्न हुई फसलें।
- फोटो : संवाद
बैराज से पानी छोड़ने से पहले तीन बार हूटर बजाया जाता है ताकि जो लोग यमुना नदी के आसपास होते हैं उन्हें निकलने का मौका मिल जाए। 70 हजार क्यूसेक पानी आने पर मिनी फ्लड माना जाता है। इसलिए बैराज के सारे गेट खोल देते हैं। ढाई लाख क्यूसेक पानी पर हाई फ्लड माना जाता है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन तैयार हैं। उन्होंने यमुना नदी से सटे गांवों के लोगों से आह्वान किया कि कोई भी व्यक्ति नहर या नदी की तरफ न जाए।