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रूस-यूक्रेन युद्ध: 6 दिन में सोनीपत लौटे 6 विद्यार्थी, 76 अभी भी फंसे, कर्नाटक के छात्र की मौत के बाद बढ़ी चिंता

Tue, 01 Mar 2022 09:33 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 01 Mar 2022 09:33 PM IST
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Six students returned to Sonipat in Six days amid Russia-Ukraine war
यूक्रेन से 6 दिन में सोनीपत लौटे 6 विद्यार्थी, 76 अभी भी फंसे - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के छह दिन बीच चुके हैं। इस दौरान हरियाणा के सोनीपत जिले के महज 6 विद्यार्थी ही यूक्रेन से लौटकर अपने घर पहुंचे हैं। इनमें दो विद्यार्थी दो दिन पहले लौटे थे, जबकि 4 विद्यार्थी मंगलवार को लौटे हैं। इनमें तन्नू उर्फ खुशी, अनीशा, चांद व युगल शामिल हैं। यूक्रेन में अभी भी 76 विद्यार्थी अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं। मंगलवार को यूक्रेन में फंसे कर्नाटक के एक छात्र की मौत के बाद से परिजनों की सांसे भी अटक गई हैं। परिजनों को अपने बच्चों की चिंता सताने लगी है। परिजन बार-बार अपने बच्चों के पास फोन कर उनका हालचाल जान रहे हैं। साथ ही यूक्रेन के हालात के बारे में भी पूछ रहे हैं। रूस के यूक्रेन पर हमला तेज करने के बाद से हालात ज्यादा बिगड़ गए हैं।

Six students returned to Sonipat in Six days amid Russia-Ukraine war
चांद अपने साथियों के साथ सफर करते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

वहां फंसे विद्यार्थियों ने बताया कि वे एक समय खाना खाकर गुजारा करने पर विवश हैं। गोलीबारी और बम धमाकों के बीच एक पल भी काटना भारी हो रहा है। युवा परिजनों से फोन पर भले ही अपने सुरक्षित होने की बात कह रहे हों, लेकिन उनकी आवाज में उनके अंदर का भय और असुविधाओं के बीच दिन काटने का दर्द साफ झलक रहा है। बातों ही बातों में विद्यार्थी परिजनों से घर आने की इच्छा भी जाहिर कर रहे हैं। यूक्रेन में भारतीय छात्र की मौत के बाद से परिजनों की चिंता और ज्यादा बढ़ गई है। यूक्रेन में बिगड़ते हालातों के बीच फंसे अपने बच्चों की चिंता में परिजनों की आंखों से नींद ही गायब हो चुकी है। हर समय बच्चों की चिंता में खाना भी नहीं भा रहा। हर समय ईश्वर से बच्चों के सकुशल लौटने की प्रार्थना में ही दिन बीत रहा है। परिजनों की सरकार से मांग है कि यूक्रेन में फंसे सभी विद्यार्थियों की जल्द वतन वापसी के प्रबंध किए जाएं। 

Six students returned to Sonipat in Six days amid Russia-Ukraine war
ठरू उल्देपुर निवासी खुशी (काली टी-शर्ट में) अपने पिता बलजीत खत्री, मां सुनीता व यूक्रेन से साथ लौटी गुरुग्राम निवासी अंकिता (लाल टी-शर्ट) के साथ। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

तन्नू उर्फ खुशी लौटी वतन, बेटी को देख छलके माता-पिता के आंसू
रोमानिया से विद्यार्थियों को लेकर एक फ्लाइट दोपहर 1.20 बजे दिल्ली पहुंची। वतन लौटने पर सभी विद्यार्थी बहुत खुश नजर आए। इन विद्यार्थियों में गन्नौर के ठरू उल्देपुर निवासी तन्नू उर्फ खुशी भी शामिल है। खुशी को लेने के लिए उसके पिता एडवोकेट बलजीत खत्री व मां सुनीता दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचे। बेटी को सकुशल देख माता-पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े। खुशी के चाचा कुलदीप खत्री ने बताया कि बेटी की वतन वापसी पर पूरा परिवार बहुत खुश है। बेटी पहले दिल्ली में रहने वाली अपनी बुआ के घर गई। वहां से शाम को गांव पहुंची है। 

भारतीय दूतावास ने की पूरी मदद, अभी भी फंसे हजारों विद्यार्थी
घर लौटी खुशी ने बताया कि यूक्रेन में हालात बेहद खराब हैं। हजारों विद्यार्थी अभी भी वहीं फंसे हुए हैं, उनमें सोनीपत के भी कई विद्यार्थी हैं। खुशी ने बताया कि वह टर्नापिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस करने के लिए तीन महीने पहले ही यूक्रेन गई थी। हालात बिगड़ने पर 24 फरवरी की फ्लाइट बुक करवाई। 23 फरवरी की रात 12 बजे कीव के लिए निकले और सुबह 6 बजे पहुंचे। हवाई अड्डे पर पहुंचने से पहले ही दोस्तों ने हवाई अड्डे पर बम ब्लास्ट होने की सूचना दी। उसके बाद सभी फ्लाइट रद्द हो गई। ट्रेनें भी बंद कर दी गईं। भारतीय दूतावास ने हमारी मदद की और हमें नजदीक ही एक स्कूल में रखा। तीन दिन से हम उसी स्कूल में रुके हुए थे। जहां पीने के लिए पानी जरूर कम था, लेकिन भारतीय दूतावास हरसंभव मदद कर रहा था। 26 फरवरी को हमें ट्रेन द्वारा इवान लाया गया। यहां से टैक्सी लेकर रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। जहां पहले से हजारों विद्यार्थी व नागरिक मौजूद थे। जिन यूनिवर्सिटी के डीन या एजेंसी वहां मौजूद थी, उन्हें ही बॉर्डर पार करने की इजाजत मिली। भारतीय दूतावास ने हर कदम पर साथ दिया। अगर भारत सरकार सहयोग नहीं करती तो वापस लौटना मुमकिन नहीं था। 

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Six students returned to Sonipat in Six days amid Russia-Ukraine war
यूक्रेन से लौटी अनीशा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक समय लग रहा था अब नहीं बचेंगे 
यूक्रेन से मंगलवार को लौटी विकास नगर निवासी अनिशा ने बताया कि मैं उजोरोद मेडिकल यूनिवर्सिटी में द्वितीय वर्ष की छात्रा हूं। नवंबर 2021 में ही यूक्रेन गई थी। भारतीय दूतावास ने 16 फरवरी की सुबह ही हमले की आशंका जताते हुए देश छोड़ने की एडवाइजरी जारी कर दी थी। फ्लाइट बुक करवाई, लेकिन सभी फ्लाइट हमला होते ही रद्द हो गई थीं। कर्फ्यू भी लग गया। उस समय लग रहा था कि अब नहीं बचेंगे, लेकिन यूनिवर्सिटी ने पूरा सहयोग किया। हमें ही नहीं चिंतित परिजनों से भी बात कर हौसला दिया। पिता सुरेश मलिक व मां सुशीला मलिक से भी रोजाना बात कर वहां के हालात बताती थी। भारतीय दूतावास के निर्देश के बाद यूनिवर्सिटी की तरफ से ही हमें 26 फरवरी की रात को ही 22 घंटे का सफर तय कर स्लोवाकिया बॉर्डर पर लाया गया। वहां से हम सभी हंगरी पहुंचे। जहां भारतीय विमान हमारे लिए तैयार था। भारतीय दूतावास की तरफ से पूरा सहयोग मिला। बेटी के सकुशल घर लौटने पर परिजनों ने खुशी जताई और भारत सरकार के सहयोग के लिए आभार जताया। 
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Six students returned to Sonipat in Six days amid Russia-Ukraine war
यूक्रेन से लौटा दीपालपुर निवासी चांद (लाल टी-शर्ट) अपने साथियों के साथ। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

सात बसें किराये पर लेकर 250 विद्यार्थियों को पहुंचाया रोमानिया बॉर्डर
यूक्रेन से मंगलवार को लौटे गांव दीपालपुर निवासी चांद ने बताया कि मैं टर्नोपिल मेडिकल यूनिवर्सिटी में द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा हूं। 25 फरवरी की सुबह आस-पास के क्षेत्रों में बम धमाकों की आवाज सुनकर सभी घबरा गए थे। चांद ने बताया कि मैं यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टूडेंट कमेटी का अध्यक्ष हूं। इसलिए सबकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हम पर थी। भारतीय दूतावास के निर्देश पर 26 फरवरी की सुबह 7 बसें किराये पर लेकर 250 विद्यार्थियों को रोमानिया बॉर्डर पहुंचाया। सबसे आखिरी बस में मैं गया। उसके बाद दूतावास से संपर्क किया, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला। जिस कारण 28 फरवरी तक खुले आसमान के नीचे माइनस तापमान में बर्फबारी के बीच फंसे रहे। बाद में भारतीय दूतावास के कहने पर रोमानिया बॉर्डर पार करवाया गया। जिसके बाद ही घर पहुंच सका हूं। रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद वहां के हालात बेहद चिंताजनक है। 

जाना था हवाई अड्डे, पहुंचा दिया बुखारेस्ट
खरखौदा निवासी डॉ. राजबीर सैनी ने बताया कि मेरा सिद्धार्थ सैनी वतन वापसी के लिए भरसक प्रयास कर रहा है, लेकिन दूतावास की तरफ से किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल रही। पहले 24 घंटे तक माइनस 8 डिग्री तापमान में बर्फबारी के बीच उन्होंने रात काटी। जैसे तैसे रोमानिया बॉर्डर पार किया। बॉर्डर से 35 युवाओं को एक बस मेें हवाई अड्डे पर ले जाने के लिए बैठा दिया। बस वाला 6 घंटे बस को घुमाता रहा। जब युवाओं ने उससे हवाई अड्डे के बारे में पूछा तो बस चालक ने बताया कि आपका स्टेशन तो बहुत पीछे छूट गया। बस चालक ने सभी को वहीं उतार दिया।

उन्होंने भारतीय दूतावास से संपर्क किया तो बताया कि ट्रेन पकड़कर बुखारेस्ट पहुंचो। स्टेशन के बाहर दूतावास की गाड़ी मिलेगी। सभी युवा देर रात 2.30 बुखारेस्ट पहुंचे, लेकिन वहां न कोई गाड़ी मिली और न ही व्यक्ति। दूतावास से संपर्क किया तो वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब 35 युवा कई घंटे से रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में एक चर्च में शरण लिए हुए हैं। डॉ. राजबीर ने कहा कि इन युवाओं की हालत तो ऐसी हो गई है कि आसमान से टपके खजूर में अटके और खजूर से गिरकर झाड़ में अटके। उन्होंने सरकार से भी विद्यार्थियों की जल्द वतन वापसी की मांग की है।

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