थारा फूफा जिंदा है, यह तख्ती पर लिखकर अनोखी बरात निकालने वाले हरियाणा के रोहतक के गांधरा के 102 साल के बुजुर्ग दुलीचंद प्रदेश के 15 हजार लोगों की पेंशन बहाल होने तक अपनी बुढ़ापा पेंशन नहीं लेंगे। शनिवार को आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद के कार्यालय में अपने दादा दुलीचंद के साथ पहुंचे पोते पवन कुमार ने यह घोषणा की। इसके साथ ही दुलीचंद के गांव के दिव्यांग राजेंद्र भी सामने आए, जिनको कागजों में मृत दिखाया गया था। बोले, अब उसकी पेंशन भी बहाल होने की उम्मीद जग गई है।
थारा फूफा जिंदा है प्रकरण: 15 हजार लोगों के कागजों में जिंदा होने तक पेंशन नहीं लेंगे 102 साल के दुलीचंद
नवीन जयहिंद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक तरफ परिवार पहचान पत्र के नाम पर सरकार बुजुर्गों की पेंशन काट रही है, दूसरी तरफ विपक्ष चुप बैठा है।
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अब वे दुलीचंद के साथ मिलकर प्रदेश के उन सभी बुजुर्गों की लड़ाई लड़ेंगे जिनको मृत दिखाकर पेंशन काटी गई है। जयहिंद ने दावा किया कि करीब 15 हजार लोगों की पेंशन काटी गई है। इसमें बुजुर्ग, विधवा व दिव्यांग भी शामिल हैं। इस मौके पर एक हेल्पलाइन नंबर (7027-811-811) भी जारी किया गया। कहा गया कि अगर इस तरीके की किसी से नाइंसाफी हो रही है तो वे इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
दिव्यांग बोला, मैंने सरपंच से लिखवाकर दे दिया है मैं जिंदा हूं
वहीं, दिव्यांग राजेंद्र का कहना है कि समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में गया था। वहां कहा गया कि सरपंच से लिखवाकर लाओ कि आप जिंदा हो। सरपंच ने लिखकर दे दिया है कि दिव्यांग राजेंद्र जिंदा है। अब उम्मीद है कि पेंशन बहाल हो जाएगी। मुझे बरात निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
41 पेंशन बहाल, 93 की जांच जारी : गोदारा
पेंशन को परिवार पहचान पत्र के साथ जोड़ा गया है। परिवार पहचान पत्र में नाम न होने के कारण 100 से ज्यादा पेंशन रुक गई थी। 41 को बहाल कर दिया गया है। 93 पेंशनधारकों के दस्तावेजों की जांच जारी है। - महावीर गोदारा, जिला समाज कल्याण अधिकारी
'फूफा' के बाद अब... 'थारी बेबे जिंदा है', दिव्यांग महिला को मृत दिखा काटी पेंशन, किया अनोखा विरोध
हरियाणा में रोहतक के बाद अब सतनाली क्षेत्र के श्यामपुरा गांव की दिव्यांग महिला ने सरकार थारी बेबे अभी जिंदा है... पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और 13 माह से मृत दिखाकर काटी गई पेंशन शुरू करने की मांग की। गांव श्यामपुरा निवासी 68 वर्षीय चंद्रपति ने रोहतक के 102 वर्षीय दुलीचंद की तर्ज पर सरकार थारी बेबे अभी जिंदा है... लिखवाकर यादव चांदनी चौक श्यामपुरा पर सरकार व समाज कल्याण अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
चंद्रपति ने बताया कि अगस्त 2021 में मृत बताकर उसकी पेंशन काट दी गई थी। दिव्यांग होने के बावजूद मैं जिला समाज कल्याण अधिकारी नारनौल के 20 से अधिक चक्कर लगा चुकी हूं। महिला का आरोप है कि मैं जिला उपायुक्त, एसडीएम से लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष पेश होकर अपने जिंदा होने का सबूत दे चुकी हूं। वहीं कैंप कार्यालयों में भी आठ से अधिक बार उपायुक्त को शिकायत दे चुकी हूं।
अगस्त 2021 में पेंशन बंद कर दी गई थी पेंशन
चंद्रपति के बेटे धर्मचंद व विनोद श्यामपुरिया ने बताया कि वे 13 माह से पेंशन बहाल कराने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। चंद्रपति 38 साल से दिव्यांग पेंशन ले रही थी, लेकिन अगस्त 2021 में बंद कर दी गई। महिला के साथ प्रदर्शन करने वाले लोगों ने सरकार व प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह में पेंशन बहाल नहीं की तो वे सतनाली-हिसार मुख्य मार्ग पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे।