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धरोहर: इस शहर में आज भी 'जिंदा' हैं अकबर, अंगद, सुल्तान और शहंशाह, बॉलीवुड फिल्मों में रही है ये भूमिका

Sat, 05 Mar 2022 08:07 PM IST
भूपेंद्र सिंह अनिल श्रीवास्तव, संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी। 
अनिल श्रीवास्तव, संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी।  Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sat, 05 Mar 2022 08:07 PM IST
सार

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी सबसे पुराना और सबसे हल्का फेयरी क्वीन भी इनमें शामिल है। ये सभी हरियाणा में रेवाड़ी जिले के लोको शेड में मौजूद हैं।

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History of Old steam engines located in the loco shed in Rewari of Haryana
हरियाणा में रेवाड़ी जिले के लोको शेड में मौजूद स्टीम इंजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

आपको जानकर हैरानी होगी कि अकबर, अंगद, सुल्तान और शहंशाह आज भी 'जिंदा' हैं और हरियाणा के रेवाड़ी में ही रहते हैं। ये कोई और नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे पुराने स्टीम इंजन हैं, जो आज भी मौजूद हैं। एक शहर के लोको शेड में खड़े हैं। इन इंजनों में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी सबसे पुराना और सबसे हल्का फेयरी क्वीन शामिल है। सबसे भारी इंजन अंगद भी शुमार है। इसके अलावा आजादी का प्रतीक बना भाप का इंजन आजाद और अकबर भी शामिल हैं। ये सभी हरियाणा में रेवाड़ी जिले के लोको शेड में मौजूद हैं।  



यहां कई बॉलीवुड फिल्मों, जैसे ‘गुरु’,‘गांधी-माई फादर’,‘रंग दे बसंती’,‘गदर एक प्रेम कथा’,‘भाग मिल्खा भाग’,‘1942-ए लव स्टोरी’,‘सुल्तान’ आदि की शूटिंग हुई है। दो साल पहले सलमान खान खुद रेवाड़ी लोकोशेड में ‘सुल्तान’ फिल्म की शूटिंग करने पहुंचे थे। वहां दो दिन तक उन्होंने ऐतिहासिक भाप इंजन ‘अकबर’ के साथ दौड़ लगाई थी। भारतीय रेलवे ने 15 अगस्त, 1947 को अमेरिका से पहली बार ‘आजाद’ नामक भाप का इंजन मंगाया था। उसकी याद में इस वर्ष अप्रैल में नई दिल्ली से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बीच ‘आजाद’ को दोबारा पटरियों पर दौड़ाया गया। चितरंजन लोको वर्क्स में निर्मित ‘अकबर’ नामक इंजन को पहली बार 1965 में चलाया गया था।

History of Old steam engines located in the loco shed in Rewari of Haryana
रेवाड़ी में लोको शेड में चल रहा सबसे पुराना और सबसे हल्का फेयरी क्वीन इंजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

फेयरी क्वीन

  • निर्माण सन: 1855(यूनाइटेड किंगडम)
  • स्पीड: 40 किमी/घंटा
  • इंजन:130 हॉर्स पावर
  • इंजन वजन : 26 टन
  • इतिहास : ईस्ट इंडिया कंपनी फेयरी क्वीन को लेकर भारत में आई थी। 1998 में इसे दुनिया के सबसे पुराने चालू हालत के भाप के इंजन के रूप में गिनीज रिकॉर्ड मिला था। यह ट्रेन पहले दिल्ली और अलवर के बीच फेयरी क्वीन स्पेशल के नाम से चलती थी। इसके अलावा भाप के सबसे हल्के इंजनों में भी यह शामिल है। सुंदरता के चलते इस सबसे हल्के भाप के इंजन का नाम फेयरी क्वीन रखा गया।
History of Old steam engines located in the loco shed in Rewari of Haryana
लोको शेड में खड़ा स्टीम इंजन आजाद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आजादी का प्रतीक बना है आजाद
  • निर्माण : सन 1947(अमेरिका)
  • स्पीड :100 किमी/घंटा
  • इंजन : 1445 हॉर्स पावर
  • इंजन वजन : 174.28 टन
  • इतिहास : इंजन का नाम ही इसकी काफी हद तक विशेषता बताता है, ‘आजाद’। अमेरिका में बने इस इंजन को यूनाइटेड स्टेट और अमेरिका ने भारत की आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को बतौर उपहार भेंट किया था। इसी के चलते इस इंजन का नाम आजाद रखा गया। यह इंजन आज भी भारत की आजादी का प्रतीक बना हुआ है।
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History of Old steam engines located in the loco shed in Rewari of Haryana
रेवाड़ी स्टेशन पर खड़ा स्टीम इंजन अकबर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

अकबर और शहंशाह भी किसी से कम नहीं हैं
विशुद्ध रूप से भारतीय भाप का इंजन अकबर भी किसी से कम नहीं है। गदर, भाग मिल्खा भाग, गांधी माई फादर, गैंग्स ऑफ वासेपुर समेत कई बड़ी सुपरहिट फिल्मों में इस इंजन का उपयोग किया गया है। रेवाड़ी में अकबर का एक साथी भाप इंजन भी है ‘डब्ल्यूपी 7200’। यह कहीं अधिक पुराना है। इसे 1947 में बॉल्डविन लोकोमोटिव वर्क्स ने बनाया था। पहले इसे हावड़ा में रखा गया। बाद में 15 अगस्त, 1947 को इस इंजन को भारतीय रेल को तोहफे में दे दिया गया। हालांकि यह भारत अक्टूबर 1947 में पहुंचा। शुरुआत में इसे ‘शहंशाह’ का नाम दिया गया था, लेकिन देश की आजादी के दिन मिलने के कारण इसे ‘आजाद’ नाम दिया गया। ब्रॉड गेज के इस इंजन को 1993 में दिल्ली स्थित नेशनल रेल म्यूजियम में रखा गया।

सबसे भारी और विशाल इंजन है अंगद का

  • निर्माण सन्: 1930(इंग्लैंड)
  • स्पीड: 75 किमी/घंटा
  • इंजन: 1492 हॉर्स पावर
  • इंजन वजन : 200टन
  • इतिहास: नाम और काम दोनों से ही अंगद है इंग्लैंड में बना भाप का सबसे भारी इंजन अंगद। 200 टन वजनी इस इंजन की चौड़ाई अन्य इंजनों की तुलना में करीब आधा फुट ज्यादा है। कारण यह इंजन रेल डिपार्टमेंट का नहीं बल्कि कोरबा थर्मल पावर स्टेशन में कोयला ढोने के काम में लाया जाता था। बताया जाता है अगर यह इंजन चलकर प्लेटफार्म साइड आए और प्लेटफार्म भी तोड़ दे।


अमेरिका के लिए तोप, बंदूकें और गोले ले जाता था विराट

  • निर्माण सन्: 1943(अमेरिका)
  • स्पीड:75 किमी/घंटा
  • इंजन:1520 हॉर्स पावर
  • इंजन वजन : 189 टन
  • इतिहास : अमेरिका में निर्मित भाप का इंजन विराट अमेरिकन वार डिपार्टमेंट के लिए असलहा जैसे तोप, बंदूकें, गोले आदि ढोने का काम करता था। तब भारत में भाप के इंजन नहीं बनते थे। उस समय इसे भारत ने अमेरिका से लिया था। विराट को अपनी कार्यक्षमता, वजन और स्पीड के सामंजस्य के लिए जाना जाता है।
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रेवाड़ी में लोको शेड में चल रहा सबसे पुराना और सबसे हल्का फेयरी क्वीन इंजन। लोको शेड में खड़ा स्टीम इंजन आजाद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

रेवाड़ी के स्टीम इंजन 20 के करीब फिल्मों में आ चुके हैं काम
1. गदर एक प्रेम कथा          वर्ष 2000 में बनी थी
2. वृत्त चित्र(टेली फिल्म)     वर्ष 2004 में बनी थी।
3. गांधी माय फादर             वर्ष 2005 में बनी थी।
4. रंग दे बसंती                   वर्ष 2005 में बनी थी।
5. पार्टीशन                        वर्ष 2005 में बनी थी।
6. गुरू                              वर्ष 2006 में बनी थी।
7. लव आज कल                वर्ष 2008 में बनी थी।
8. वीर                              वर्ष 2009 में बनी थी।
9. प्रणायाम(मलयालम फिल्म )   वर्ष 2011 में बनी थी।
10. गैंग्स ऑफ वासेपुर        वर्ष 2012 में बनी थी।
11. भाग मिल्खा भाग         वर्ष 2012 में बनी थी।
12. स्टारिंग पोरनवी(मलयालम फिल्म) वर्ष 2013 में बनी थी। 
13. एक था चन्दर, एक थी सुधा(टीवी धारावाहिक)   वर्ष 2014 में बनी थी।
14. जॉनीसार                    वर्ष 2015 में बनी थी।
15. की एंड का                   वर्ष 2015 में बनी थी।
16. सुल्तान                      वर्ष 2016 में बनी थी।
17. करीब करीब सिंगल      वर्ष 2017 में बनी थी।
18. विजय 61 (तमिल)      वर्ष 2017 में बनी थी।
19. राईफल मेन जसवंत सिंह रावत       वर्ष 2017 में बनी थी।
20. भारत                         वर्ष 2018 में बनी थी।
 

रेवाड़ी लोको शेड में दुनिया के सबसे पुराने और ऐतिहासिक भाप के इंजन चालू हालत में हैं। सभी इंजनों का अलग ही इतिहास है। फेयरी क्वीन देखने के लिए तो लोको शेड में विदेशी सैलानी भी आते रहते हैं। - आरएच मीणा, लोको फोरमैन, रेवाड़ी स्टीम लोको


देश का एकमात्र हैरिटेज लोकोशेड बना पर्यटकों की आकर्षण का केंद्र
रेवाड़ी में स्थित देश का एकमात्र हैरिटेज लोकोशेड पर्यटकों को खूब पसंद आ रहा है। हालांकि कोरोना में लोकोशेड की रौनक काफी पड़ गई थी। मगर कोरोना काल के थमने के बाद लोकोशेड में दूर-दूर से पर्यटक यहां के इतिहास के बारे में जानने व घूमने के लिए आ रहे है। पहले लोकोशेड में एंट्री फ्री रहती थी, लेकिन जबसे यहां ट्वॉय ट्रेन और अम्युलेटर जैसी एक्टिविटी शुरू की गई है तब से यहाँ एंट्री पर ना टिकट लगा दी है। इसका रेट भी न के बराबर है। बच्चों के लिए 5 रुपये और बड़ों के लिए दस रुपये टिकट निर्धारित किए गए हैं। लोकोशेड में फेयरी क्वीन इंजन के साथ अकबर, अंगद, सुल्तान सहित शहंशाह जैसे स्टीम इंजन पर्यटकों की आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। फेयरी क्वीन स्टीम इंजन 1853 में बना था, जिसे आज भी भारतीय रेल ने संभालकर रखा हुआ है।

रेवाड़ी लोकोशेड में एक म्यूजिम भी बनाया हुआ है. जहां भाप के इंजन की यादों को जिंदा रखा गया है. ताकि युवा पीढ़ी भारतीय रेल का शुरू से लेकर अबतक का सफ़र जान सकें। लोकोशेड के भीतर ही पर्यटकों को लुभाने के लिए टॉय ट्रेन भी चलाई जाती है। जिसका 800 मीटर का ट्रेक लगाया हुआ है। इसके आलावा लोकोशेड के अंदर ही एक ऐसी जगह बनाई गई है, जिसे देखकर आप यहीं से ही भारतीय रेल का मानचित्र देख सकते हैं कि कैसे-कैसे स्थानों पर भारतीय रेल सेवाएं दे रही है। इसके साथ ही लोकोशेड में स्टीम एम्युलेटर और कोच एम्युलेटर रूप बनाये गए हैं। जहां वर्चुअल तरीके से और थ्री-डी डिवाइस के जरिये इंजन में बैठने का अनुभव महसूस कराया जाता है। यहां पर एक डॉक्युमेंट्री के जरिये रेलवे के अबतक के सफ़र को पर्यटकों को दिखाया जाता है।

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