टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाले नीरज चोपड़ा के नाम पर पुणे में नवनिर्मित स्टेडियम का नामकरण किया गया है। इस पर नीरज के कोच और साथियों ने खुशी जाहिर की है। उनका कहना है कि कभी नीरज को अभ्यास करने के लिए समतल मैदान नसीब नहीं होता था, लेकिन आज पुणे में उसके नाम पर स्टेडियम है। यह पानीपत और हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है।
कोच जितेंद्र ने बताया कि जब नीरज से पहली बार जेवलिन थ्रो कराया तो उसमें बेहतर संभावनाएं देखते हुए तैयारी के लिए कहा था, लेकिन उस समय जिले में केवल शिवाजी स्टेडियम ही था। शिवाजी स्टेडियम को नीरज और उनके साथियों ने समतल करने की कोशिश की थी। जिसके बाद नीरज के साथी व दूसरे कोच जयवीर अहलावत उनको अपने साथ समतल ग्राउंड की तलाश में यमुनानगर स्टेडियम ले गए थे। यमुनानगर जाने के बाद नीरज ने फिर कभी पानीपत के स्टेडियम की ओर मुड़कर नहीं देखा।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने की थी घोषणा
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नीरज चोपड़ा
- फोटो : Instagram/Neeraj Chopra
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले सूबेदार नीरज चोपडा के नाम पर पुणे स्टेडियम का नाम रखने की घोषणा की थी, सोमवार को इसका उद्घाटन करना था, लेकिन किसी कारणवश उद्घाटन नहीं हो पाया।
ग्रामीण बाेले- गांव के लिए गर्व की बात, नीरज प्रेरणा का प्रतीक
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नीरज चोपड़ा अपने माता-पिता के साथ
- फोटो : PTI
ग्रामीण अमन ने बताया कि हमारे गांव के लिए गर्व की बात है कि भाई नीरज के नाम पर सरकार ने पुणे के स्टेडियम का नाम रख दिया है। इससे पहले हमारे गांव के किसी भी खिलाड़ी ने इतनी बड़ी उपलब्धि प्राप्त नहीं की थी कि उसके नाम पर स्टेडियम का नाम रखा गया हो। गांव के दीपक ने बताया कि अब गांव के सभी युवाओं को जोश है कि वह भी नीरज चोपड़ा की तरह अपने खेल में अच्छा प्रदर्शन दिखाकर देश का नाम रोशन करेंगे। नीरज अब देश के लिए गौरव और प्रेरणा का प्रतीक है।
जेवलिन थ्रो अभ्यास के लिए बदलना पड़ा था स्टेडियम
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जेवलिन थ्रो प्लेयर नीरज चोपड़ा
- फोटो : अमर उजाला
एथलेटिक्स कोच जितेंद्र जागलान का कहना है कि जब नीरज ने पहली बार में ही 25 मीटर से ज्यादा जेवलिन थ्रो किया तो हमने उसकी प्रतिभा को देखते हुए समतल मैदान में अभ्यास करने को कहा था। शिवाजी स्टेडियम में घास व समतल ग्राउंड न होने के कारण उसे खेल के शुरुआत में ही अच्छे स्टेडियम के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। वहीं नीरज के साथी बताते हैं कि नीरज यमुनानगर, उड़ीसा, पटियाला जैसे बड़े-बड़े व आधुनिक स्टेडियम में ही अभ्यास करते रहे। जिसका नतीजा टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है।
हरियाणा के लिए गर्व की बात
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ हरियाणा के सचिव राजकुमार मिटान ने कहा कि गर्व की बात है कि हरियाणा के लाल नीरज चोपड़ा के नाम पर आर्मी का खेल स्टेडियम होगा। अब हम एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को उदाहरण देकर प्रोत्साहित कर सकेंगे कि यदि वह भी इस तरह से खेलेंगे तो उनका भी नाम देश विदेश में चमकेगा।