हरियाणा में जींद जिले की जनंसख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है लेकिन उस हिसाब से सुविधाएं नहीं बढ़ रही हैं। जिले में जनसंख्या के हिसाब से सबसे अधिक शिक्षा व स्वास्थ्य के सुधार की जरूरत है। 1966 में जब जींद जिला बना उस समय जिले की जनसंख्या तीन लाख 70 हजार थी लेकिन अब आबादी 15 लाख को पार कर गई है। कभी जींद शहर में तांगा चौक के नाम से 10 दुकानों में ही पूरा बाजार था लेकिन आज रेलवे स्टेशन से लेकर पिंडारा गांव तक लगभग 12 किलोमीटर तक फैल गया है।
Jind: तीन लाख 70 हजार की जनसंख्या का जिला पहुंचा 15 लाख के पार, जानिए जिले के बारे में रोचक आंकड़े
1966 में बने जींद जिले में शिक्षा व स्वास्थ्य की सुविधाओं में जनसंख्या के हिसाब से वृद्धि नहीं हो पाई है। जींद में कभी तांगा चौक पर ही पूरा बाजार था, आज बाजार चारों तरफ फैला है।
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जींद में जनसंख्या के हिसाब से धर्म
धर्म का नाम जनसंख्या प्रतिशत
- हिंदू 95.69
- मुस्लिम 1.73
- ईसाई 0.07
- सिख 2.18
- बौद्ध 0.01
- जैन 0.19
- अघोषित 0.12
भाषा
जिले में 99 प्रतिशत लोग हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं जबकि एक प्रतिशत लोग पंजाबी भाषा बोलते हैं।
जिले में पहले व अब की स्थिति
1966 2022
- क्षेत्रफल 2691 वर्ग किलोमीटर 2702 वर्ग किलोमीटर
- आबादी 370010 15 लाख पार
- गांव 301 299
- नगरपरिषद/पालिका 05 05
- उपमंडल 02 04
- पुलिस थाना 05 13
- साक्षरता दर 18.51 75.7
इस प्रकार से बढ़ी जनसंख्या
1971
1981
1991
2001
2011
2022
369610
636428
797560
1189827
1334152
15 लाख पार
जिले की जनंसख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इसको नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिवार नियोजन के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जनसंख्या पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है। -डॉ. मंजू कादियान, सिविल सर्जन
आबादी का सीधा असर पर्यावरण और संसाधन पर पड़ता है। जनसंख्या दबाव के कारण पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। जनसंख्या वृद्धि से वायु, जल और मृदा प्रदूषण के स्तर में तेजी से इजाफा हो रहा है। -किताब सिंह भनवाला, रिटायर्ड बीईओ
शहर जनसंख्या का दबाव झेल रहा है। लगातार बढ़ती जनसंख्या का असर संसाधनों पर हो रहा है। युवा बाहर की तरफ जा रहे हैं। आने वाले समय में जनंसख्या में बढ़ोतरी के कारण पढ़ाई, दवाई और कमाई के साधन पर गहरा असर पड़ेगा। अस्पताल, स्कूल और कॉलेज कम पड़ जाएंगे। -डॉ. सुनील फौगाट, अर्थशास्त्री
पिछले कुछ समय से गांव और शहर में आबादी काफी तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह से शहर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। शहर में जरूरत के अनुसार सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है। कोशिश रहती है कि शहर में किसी भी व्यक्ति को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानी नहीं उठानी पड़ी। जनसंख्या नियंत्रण की सख्त जरूरत है। -डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद
जनसंख्या बढने से शहर में ट्रैफिक बढ़ा है। खुला वातावरण कम हो गया है। इमारत, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल बन गए हैं लेकिन सुविधाएं कम होती जा रही हैं। इनको और बढ़ाने की जरूरत है। शहर में सबसे बड़ी संख्या सीवरेज ओवरफ्लो तथा सड़कों की हालत की है। यह व्यवस्था बहुत खराब है। इसके अलावा पॉश कॉलोनियों की हालत गांवों जैसी है। सुविधाएं बढ़ाने की बहुत जरूरत है। -टेकराम कंडेला, खाप नेता
जिस प्रकार से शहर व गांवों की आबादी बढ़ रही है, उस हिसाब से सुविधाएं नहीं बढ़ रही हैं। जिले में स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूत करने की जरूरत है। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण बीमार लोगों को दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। सरकार को जनसंख्या के हिसाब से सुविधाएं भी बढ़ानी चाहिएं। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में भी काफी सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है। -परमेंद्र सिंह ढुल, पूर्व विधायक।
शहर की जनसंख्या बढने से ट्रेफिक, ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव बढ़ा है, लेकिन भविष्य को बेहतर बनाने के लिए सरकार की तरफ से हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। शहर में जाम नहीं लगे इसके लिए हांसी रोड, पटियाला चौक, रोहतक रोड, भिवानी रोड, पिंडारा गांव, गोहाना रोड पर आओबी बनाए गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए जींद में मेडिकल कॉलेज का निर्माण चल रहा है। पुराने बस स्टैंड को नए बस स्टैंड पर खुली जगह में शिफ्ट किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में जिले में विश्वविद्यालय खोला गया है। समय के अनुसार और जरूरत के अनुसार विकास किया जा रहा है। -डॉ. कृष्ण मिड्ढा, विधायक जींद।