आईआईटियन बाबा अभय सिंह सोमवार को इंजीनियर पत्नी के साथ घर लौटकर तमाम लोगों को चौंका गए। बेटे के सांसारिक पटरी पर लौट आने से मां-बाप और परिजन बेशक बेहद खुश हुए। हैरान गांव वाले हुए कि मोह-माया से दूर आध्यात्मिक दुनिया में रमे अभय अचानक बंधन में कैसे बंध गए?
देश की अति प्रतिष्ठित आईआईटी मुंबई से बीटेक करके अभय ने सपनों की बड़ी उड़ान भरी थी। कोरोना की भयावह आपदा में उन्हें घर की ऐसी याद सताई कि वे कनाडा की नौकरी हमेशा के लिए छोड़ आए। कठिन दौर में ऐसा दार्शनिक ज्ञान हो गया कि देश लौटकर नौकरी ही नहीं की।
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झज्जर के सासरौली गांव में परिवार के साथ बाबा अभय और पत्नी प्रतीका
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कुछ वक्त फोटोग्राफी की। फिर देशाटन पर निकलकर केरल घूम आए। कहीं चैन नहीं पाया तो काशी (वाराणसी) चले गए। 2023 में यहीं अपने गुरुजी से मिले और मोह-माया के बंधन से मुक्त मानकर घरवालों से हमेशा के लिए दूरी बना ली।
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इंजीनियर पत्नी के साथ आईआईटियन बाबा अभय सिंह
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उनका कभी हाल चाल तक न लिया। 2025 के प्रयागराज महाकुंभ में उनके क्रियाकलापों ने सुर्खियां पाईं तो घरवाले भी उनके नए रंग-रूप और सफर से वाकिफ हुए।
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झज्जर के सासरौली गांव में रस्म अदा करते अभय व प्रतीका
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिजनों को यकीन नहीं था कि अभय कभी सांसारिक दुनिया में भी लौटेंगे। लेकिन, सोमवार को इंजीनियर पत्नी प्रीतिका के साथ पहुंचे तो घर में खुशियां लौट आईं। मां ने बेटे-बहू की मंगल आरती उतारी।
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झज्जर के सासरौली गांव में रस्म अदा करते अभय व प्रतीका
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हंसी-ठिठोली के बीच शादी के बाद की रस्में भी हुईं। बाबा अपनी पत्नी के साथ हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला लौट गए हैं। वे यहीं पर सनातन धर्म पर शोध और अध्ययन के लिए एक यूनिवर्सिटी स्थापित करने का संकल्प लिए हुए हैं।