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ग्राउंड रिपोर्ट : बेरोजगारी को दे मात, बागवानी में एक कर दिए दिन-रात, रेतीली जमीन से यूं उठाया लाभ 

Thu, 25 Feb 2021 11:49 AM IST
निवेदिता वर्मा यशपाल शर्मा, अमर उजाला, झुंपा कलां/भिवानी (हरियाणा)
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, झुंपा कलां/भिवानी (हरियाणा) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 25 Feb 2021 11:49 AM IST
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Haryana : Farmers of village Jhumpa Kalan did gardening and earn money 
प्रगतिशील किसान जितेंद्र - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा का जिला भिवानी। इस जिले का गांव है झुंपा कलां। जहां राजस्थान सीमा से सटे हरियाणा के गांव नहरी पानी की कमी झेल रहे हैं, वहीं इस गांव की सूरत बदली बदली सी दिखती है। यहां पहुंचकर लगता ही नहीं कि राजस्थान सीमा से सटा है। गांव की अधिकतर जमीन में सरसों व गेहूं लहलहा रही है। कहीं-कहीं किन्नू के बगीचे भी हैं। यहां की नहरों में बीते डेढ़ साल से आ रहे पर्याप्त पानी का प्रगतिशील और मेहनती किसानों ने भरपूर फायदा उठाया है। इसी गांव के प्रगतिशील किसान जितेंद्र ने बेरोजगारी को मात देते हुए 22 किले में जैविक बगीचा तैयार कर दिया है। 13 महीने पहले तैयार बगीचे में उन्होंने अमरूद और किन्नू के पेड़ लगाए हैं। इसमें वह सरसों व गेहूं की फसल भी ले रहे हैं। तीन किल्ले जमीन उन्होंने माल्टा लगाने के लिए रखी है। जितेंद्र बताते हैं कि  इस बार बरसात में माल्टा लगाने की पूरी तैयारी है। वह अपनी जमीन में यूरिया बिल्कुल नहीं डालते। जून 2020 अपना गोबर गैस प्लांट लगा लिया। हिसार से अपनी दो ट्रॉलियों में गोबर भरकर लाते हैं। जैविक खाद तैयार करने के लिए बनाए गड्ढों में एक बार में 40 से 50 क्विंटल गोबर डाल देते हैं। 

Haryana : Farmers of village Jhumpa Kalan did gardening and earn money 
प्रगतिशील किसान मयंक। - फोटो : अमर उजाला

झुंपा कलां के ही मयंक गोदारा ने भी साढ़े तेरह एकड़ में बगीचा बनाकर किन्नू के पेड़ लगाए हुए हैं। 5 साल से वह भरपूर फसल ले रहे हैं। राजस्थान व हरियाणा की मंडियों के अलावा सड़क किनारे खुले में किन्नू बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। काफी पहले वह अपने चाचा के साथ मिलकर स्ट्राबेरी की खेती में भी नाम कमा चुके हैं। नौकरी न मिलने पर उन्होंने किसानी, बागवानी में ही हाथ आजमाने की ठानी और सफल भी हुए।

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प्रगतिशील किसान जितेंद्र - फोटो : अमर उजाला

ससुराल और गंगानगर में बगीचे देखकर हुए प्रोत्साहित
प्रगतिशील किसान जितेंद्र ने बताया कि उनका ससुराल पंजाब के अबोहर में है। उन्होंने वहां पर और राजस्थान के गंगानगर में रेतीली जमीन में किन्नू की खेती देखी। इसके बाद मन में अपना बगीचा लगाने का विचार आया। इसमें जिला उद्यान अधिकारी भिवानी हीरा लाल ने मदद की। उन्होंने किन्नू के साथ अमरूद लगाने को प्रेरित किया। कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि वह हर गांव में पर्याप्त नहरी पानी पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं। नई परियोजनाओं को स्वीकृत कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री व उनका उद्देश्य पूरे भिवानी जिले को खुशहाल बनाना है।

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झुंपा कलां में लहलहाते पौधे। - फोटो : अमर उजाला

बगीचा लगाएं न लगाएं की दुविधा में फंसे रहे
डेढ़ साल पहले तक झुंपा कलां की नहरों में पानी उचित मात्रा में नहीं आता था। पानी की चोरी भी खूब होती थी। एसडीओ कैनाल परमवीर सख्ती कर सिस्टम को पटरी पर लाए, जिसमें कृषि मंत्री जेपी दलाल का भी साथ मिला। जितेंद्र ने बताया कि उन्होंने 12 एकड़ में अमरूद लगाए हैं। प्रति एकड़ 182 पौधे अमरूद की हिसार सफेदा व उत्तर प्रदेश की बर्फ खान किस्म के लगाए हैं। किन्नू दस एकड़ में लगाया है, जिसमें भी प्रति एकड़ 182 पौधे हैं। अमरूद अगले साल से व किन्नू दो साल बाद फसल देने लगेगा।

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झुंपा कलां में प्रगतिशील किसान बागवानी से उठा रहे फायदा। - फोटो : अमर उजाला

बगीचों में दोनों किसानों ने ये प्रणाली भी अपनाई

  • ड्रिप सिंचाई सुविधा से कर रहे खेती
  • सोलर पावर प्लांट खेतों में लगाए
  • सरकारी योजना के तहत पानी के टैंक बनवाए
  • नहरी पानी को ट्यूवेल में डालकर कर रहे भंडारण
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