नारनौल के कनीना सामूहिक दुष्कर्म कांड में तीन मुख्य दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद जेल ले जाया गया है। पीड़िता के गुनहगार तीनों दोषी 20 साल तक कठोर कारावास की सजा भुगतेंगे। तीनों को 20-20 हजार रुपये जुर्माना नहीं देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। मामले में पांच आरोपियों को बरी कर दिया गया है। आपको बता दें कि कोचिंग क्लास से आ रही छात्रा को नशीला पदार्थ देकर दरिंदगी की गई थी। मामला बहुचर्चित हो गया था और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठने के साथ ही सरकार की भी किरकिरी हुई थी। हालांकि बाद में पीड़िता की सुध लेने खुद सीएम मनोहर लाल पहुंचे थे। आइए जानते हैं मामला क्या था...
रेवाड़ी सामूहिक दुष्कर्म कांड: आठ घंटे में चकनाचूर हुए थे होनहार छात्रा के सपने, जानें उस काले दिन का सच
नारनौल के कनीना में हुए बहुचर्चित दुष्कर्म कांड में आखिर न्यायालय ने फैसला सुना दिया है। वारदात के बाद जहां पुलिस पर सवाल उठे थे, वहीं, सरकार ने किरकिरी के बाद कई अफसरों पर कार्रवाई की थी। कुछ को सस्पेंड भी किया गया था। हालांकि अब तीनों दोषियों को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं, पांच मामले में बरी भी हो गए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आठ घंटे तक किया था दुष्कर्म
12 सितंबर का दिन था, पीड़िता कोचिंग से लौट रही थी। बस स्टैंड पर उसके परिवार का जानकार पंकज और पड़ोस में रहने वाला निशु मिला। उन्होंने उसे घर पहुंचाने की बात कहकर बाइक पर बैठा लिया। रास्ते में उन्होंने उसे पानी पिलाया, जिसे पीते ही वह बेहोश हो गई। फिर दोनों लड़की को दीनदयाल के कमरे में ले गए। वहां निशु ने मनीष को भी बुलाया और फिर तीनों ने उसके साथ दुराचार किया। हालत बिगड़ी तो इन लोगों ने गांव के ही एक चिकित्सक संजीव को घटनास्थल पर बुलाया। चिकित्सक पीड़िता को प्राथमिक उपचार देकर मौके से चला गया।
ये भी पढ़ें-11 माह बाद खुलेगा रास्ता: टीकरी बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने हटाए बैरिकेड, शुक्रवार को हो सकता है एक तरफ का यातायात बहाल
सात घंटे तक भटका था पिता
भागने के बाद निशु ने पीड़िता के पिता को फोन करके कहा कि उसकी तबीयत खराब है और बस स्टैंड पर बेहोशी की हालत में है। खबर मिलते ही पिता बस स्टैंड पहुंचे और बेटी को संभाला। होश आया तो उसने सारी वारदात के बारे में बताया। पिता उसे तुरंत महिला पुलिस थाने ले गए, लेकिन पुलिस ने साथ ही नहीं दिया। महिला अफसर ने उनके द्वारा दी गई शिकायत की कॉपी फाड़ दी और उन्हें डांटकर भगा दिया। करीब छह सात घंटे तक भटकते रहे।
एसआईटी ने की थी मामले की जांच
परिवार के जानकार आरोपी पंकज और पड़ोस में रहने वाले निशु ने उसे घर पहुंचाने की बात कहकर बाइक पर बैठाया था। मामले में किरकिरी से बचने के लिए एडीजीपी श्रीकांत जाधव ने एक एसआईटी गठित की थी। एसआईटी इंचार्ज नाजनीन ने पीड़िता से मुलाकात करके मामले की जानकारी ली थी। फिर सीएम साहब ने कहा था कि आरोपियों की पहचान हो गई है। आरोपी और पीड़िता एक-दूसरे को जानते थे। एक आरोपी सेना का जवान है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। उसके बाद रेवाड़ी के एसपी राजेश दुग्गल को हटाने के आदेश जारी कर दिए। सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. सुदर्शन पंवार और महिला थाने की सब इंस्पेक्टर हीरामणि को भी लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किया गया था।
ये भी पढ़ें-सोनीपत: कुंडली बॉर्डर पर 95 वर्षीय निहंग सिख की मौत, कई दिनों से थे बीमार
पीड़िता के पिता की बदौलत मिली थी आरोपी पंकज को नौकरी
तीनों आरोपी पीड़िता और उसके परिजनों के जानकार थे। आरोपी पंकज को वारदात से डेढ़ साल पहले पीड़िता के पिता की बदौलत ही सेना में नौकरी मिली थी और उसने उसी ने बेटी की इज्जत तार-तार कर दी। जब पंकज को सेना की नौकरी मिली थी, तो उसने पीड़िता के पिता को गुरु मानकर सम्मानित भी किया था। इसके बाद ही उसका पीड़िता के घर आना-जाना हो गया। इसी जानकारी का फायदा उठाकर वह छात्रा को कनीना से अपने साथ ले आया।
आठ घंटे तक किया था दुष्कर्म
12 सितंबर का दिन था, पीड़िता कोचिंग से लौट रही थी। बस स्टैंड पर उसके परिवार का जानकार पंकज और पड़ोस में रहने वाला निशु मिला। उन्होंने उसे घर पहुंचाने की बात कहकर बाइक पर बैठा लिया। रास्ते में उन्होंने उसे पानी पिलाया, जिसे पीते ही वह बेहोश हो गई। फिर दोनों लड़की को दीनदयाल के कमरे में ले गए। जहां लड़की के साथ तीन लड़कों ने आठ घंटे तक बर्बरतापूर्वक दुराचार किया। निशु ने मनीष को भी बुलाया और फिर तीनों ने 8 घंटे तक उसके साथ दुराचार किया। हालत बिगड़ी तो डॉक्टर को बुलाया और फिर इलाज कराने के बाद वे उसे वापिस बस स्टैंड पर फेंक गए।
शुरू में मामले को लेकर पुलिस और सरकार दोनों ने किरकिरी कराई। जब सीएम खट्टर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पुलिस अपना काम कर रही है। बस इतनी बात कही और वे निकल गए। इससे सीएम विरोधियों के निशाने पर आ गए। फिर शुरू हुआ बयानबाजी और सरकार के खिलाफ तंज कसने का दौर। फिर सीएम ने मामले पर खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि आरोपियों की पहचान हो गई है। नीशु पर गांव की एक युवती से छेड़छाड़ का आरोप लगा था, लेकिन बाद में ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर मामले को निपटा दिया था।
51 गांवों की महापंचायत लिए गए थे कई बड़े फैसले
कांड के विरोध में कोसली में 51 गांवों की महापंचायत हुई थी, जिसमें ग्रामीणों ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए सरकार और पुलिस को चेतावनी दे डाली थी। दरअसल हरियाणा में हुई इस घटना से लोग काफी गुस्से में थे। विरोध का दौर भी थमने का नाम नहीं ले रहा था। वक्ताओं ने कहा था कि यदि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया तो धरने का प्रारंभ किया जाएगा, जो अनिश्चितकाल तक चलेगा।
ये भी पढ़ें-हरियाणा: अनुभाग अधिकारी की मुहर व हस्ताक्षर से लिपिक के वेतन निर्धारण में किया फर्जीवाड़ा, डीईओ भिवानी ने सही भेजी थी फाइल
पत्नी ने छोड़ दिया पंकज का साथ
मुख्य आरोपी पंकज की पत्नी उसके खिलाफ हो गई थी। पत्नी ज्योति ने कहा था कि उसका पंकज के साथ अब कोई रिश्ता नहीं है। उसने उसके साथ धोखा किया है। बता दें कि 15 नवंबर 2017 को आरोपी पंकज की शादी गांव कुराहवटा निवासी मनोज की बेटी ज्योति के साथ हुई थी। ज्योति ने बताया था कि उसने पंकज के बारे इस प्रकार की कोई शिकायत नहीं सुनी थी। वहीं, पुलिस को जांच में पता चला था कि निशु फेसबुक पर खूब सक्रिय रहता था। उसने अपने फेसबुक अकाउंट पर महिलाओं व लड़कियों से छेड़छाड़ की शेखी बघारने वाले कई आपत्तिजनक पोस्ट किए थे।
कोसली थाना प्रभारी को भेजा था पुलिस लाइन
सामूहिक दुष्कर्म मामले में कोसली थाना प्रभारी सतेंद्र को भी पुलिस लाइन में भेज दिया गया था। हालांकि पुलिस अधिकारियों द्वारा इसकी साफ वजह नहीं बताई गई थी। आरोपियों ने पकड़े जाने के बाद कबूल किया था कि वे वारदात के बाद डर गए थे। क्योंकि मामला सीएम तक पहुंच गया था। इसके बाद वे बाइक से रिश्तेदारी में राजस्थान चले गए थे। बाद में वहां से लौटे। फिर भागने की फिराक में थे कि पकड़े गए।
आरोपियों की पैरवी से वकीलों ने किया था इनकार
कोसली बार एसोसिएशन के प्रधान दुष्यंत यादव और सभी वकीलों ने एकमत से फैसला लिया था कि कोई भी वकील सामूहिक दुष्कर्म कांड के आरोपियों पैरवी नहीं करेगा। साथ ही हरियाणा की हर बार एसोसिएशन का समर्थन लिया जाएगा।
ये भी पढ़ें-हरियाणा-अफ्रीका कॉन्क्लेव, सीरीज-1: द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए जुटे 12 अफ्रीकी देशों के राजदूत
33 गवाहों ने दर्ज करवाए थे बयान
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं चेयरमैन ने कर्ण सिंह यादव एडवोकेट को उपरोक्त केस की पैरवी पीड़ित पक्ष की तरफ से करने के लिए नियुक्त किया था। इसमें 33 गवाहों की गवाही करवाई थी। अदालत ने तीन मुख्य आरोपियों को दोषी करार दिया है। वहीं, पीड़िता की मां से बात की गई तो उन्होंने पांच आरोपितों को बरी करने के फैसले से असंतोष जताया है। उनका कहना है कि यह फैसला नहीं समझौता है, जो हमें मंजूर नहीं है। न्यायालय के निर्णय का रिकॉर्ड लेकर उच्च न्यायालय में अपील की जाएगी।
पांच आरोपी किए गए बरी
नारनौल जिले के कनीना के बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में एडिशनल सेशन जज मोना सिंह की अदालत ने वीरवार को तीन मुख्य आरोपियों मनीष, पंकज व निशु को दोषी करार दिया था। बाकी पांच अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। तीन दोषियों को शुक्रवार को सजा सुनाई गई है। पीड़ित पक्ष की तरफ अधिवक्ता करण सिंह यादव ने निःशुल्क केस की पैरवी की थी।