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Sarabjot: लकड़ी के बोर्ड पर करते थे प्रैक्टिस, बस में खाए धक्के, जी-तोड़ मेहनत से जीता ओलंपिक में पदक

Tue, 30 Jul 2024 10:26 PM IST
भूपेंद्र सिंह रमाकांत अत्रि, संवाद न्यूज एजेंसी, मुलाना, अंबाला (हरियाणा)
रमाकांत अत्रि, संवाद न्यूज एजेंसी, मुलाना, अंबाला (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 30 Jul 2024 10:26 PM IST
सार

हरियाणा के अंबाला के धीन गांव के रहने वाले शूटर सरबजोत सिंह ने पहली बार ओलंपिक में भाग लिया और पहली ही बार में कांस्य पदक झटक कर कीर्तिमान स्थापित किया।

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Olympics: How Haryana's Sarabjot become a Shooter, Success story in Hindi
सरबजोत सिंह। - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के अंबाला के धीन गांव के रहने वाले शूटर सरबजोत सिंह ने पहली बार ओलंपिक में भाग लिया और पहली ही बार में कांस्य पदक झटक कर कीर्तिमान स्थापित किया। अंबाला के वह पहले खिलाड़ी हैं जो ओलंपिक में पदक लेकर आए हैं। खास बात है कि शूटिंग में सरबजोत सिंह के कॅरिअर की शुरुआत उनके यमुनानगर स्थित स्कूल से हुई थी। मगर वह अपने घर की दीवार पर बने लकड़ी के बोर्ड का सहारा लेकर घंटों प्रैक्टिस किया करते थे। खेल में रुचि बनी तो अंबाला में एक निजी अकादमी में जाना शुरू कर दिया। यहां कोच अभिषेक राणा का साथ मिला और सरबजोत ने जी-तोड़ मेहनत की तो आज वह ओलंपिक में कांस्य पदक के विजेता बने।
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सरबजोत के पिता जितेंद्र सिंह को मिठाई खिलाते हुए। - फोटो : संवाद

सरबजोत सिंह के पिता जितेंद्र सिंह बताते हैं कि बेटा शूटिंग खेल में कॅरिअर बनाना चाहता था तो हमने भी साथ किया कहा पूरा मन लगाकर प्रयास करो सभी रास्ते भगवान खोलेगा। इसके बाद बेटे ने मेहनत शुरू कर दी। रोजाना जल्दी उठकर अंबाला छावनी में अकादमी में ट्रेनिंग के लिए जाना होता था।

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सरबजोत - फोटो : PTI

तब घर से गांव की सड़क भी काफी खराब थी। ऐसे में रोजाना जाना भी मुश्किल होता था। इसके बाद बस के लिए इंतजार करना और फिर बस के धक्के खाते हुए अकादमी तक पहुंचना होता था। इतनी परेशानियों के बावजूद सरबजोत नियम से रोजाना समय से अपनी कोचिंग पहुंचता था।

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मनु भाकर और सरबजोत सिंह - फोटो : Twitter

देश के लिए कुछ कर सका : सरबजोत
पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद सरबजोत बताया कि उन्हें खुशी है कि वह देश के लिए कुछ कर सके। मगर इसके साथ ही मलाल भी है कि एकल मुकाबले के लिए उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा लगाई थी। इस मुकाबले ने कई सीख दी हैं, जिन्हें लेकर वह अब आगे की तैयारी करेंगे।

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सरबजोत सिंह - फोटो : PTI

ध्यान खेल की प्रक्रिया पर हो : अभिषेक
सरबजोत के कोच अभिषेक राणा ने बताया कि वह बीते दो महीने से विदेश में सरबजोत को तैयार कर रहे थे। एकल मुकाबले में चूकने के बाद सरबजोत को हताशा न हो इसके लिए उन्होंने समझाया था कि अपने प्रोसेस पर ध्यान दो। सरबजोत ने अपनी कमियों को खोजा और उन पर काम करने के बाद वह सोमवार को क्वालीफाई मुकाबले में उतरा था। क्वालीफाई करने के बाद कोच ने यही समझाया कि आपकी प्रोसेस अच्छी होगी तो रिजल्ट भी अच्छा होगा। सिर्फ इस बात पर ध्यान दो कि खेल वैसे ही खेलना जैसे ट्रेनिंग के दौरान खेलते रहे हो। बिना दबाव लिए, बिना आसपास घटित हो रहे माहौल पर ध्यान देते हुए। क्योंकि अगर प्रोसेस अच्छा होगा तो प्रदर्शन भी अच्छा होगा।

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