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Olympics: बेटा सरबजोत भावुक न हो जाए इसलिए पिता नहीं गए पेरिस, अब पदक जीतते ही खुद हुए भावुक

Tue, 30 Jul 2024 02:20 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, अंबाला (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, अंबाला (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 30 Jul 2024 02:20 PM IST
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Olympics: Father did not go to Paris so that son Sarabjot does not get emotional
सरबजोत के पिता जितेंद्र सिंह को मिठाई खिलाते हुए। - फोटो : संवाद

अंबाला के मुलाना के छोटे से गांव धीन के रहने वाले शूटर सरबजोत ने पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीत लिया है। इससे परिवार सहित पूरे देश में खुशी का माहौल है। सरबजोत के लिए यह ओलंपिक में पहला पदक है तो मनु भाकर ने दूसरा पदक जीतकर सभी को गर्व का अहसास कराया है। जिस समय सरबजोत और मनु भाकर की जोड़ी का दोपहर एक बजे मुकाबला शुरू हुआ उस समय सरबजोत के पिता जितेंद्र सिंह अंबाल छावनी स्थित शूटिंग अकादमी में उसके सहयोगियों के साथ थे। उन्होंने कहा कि मैं कभी फाइनल मैच नहीं देखता आज भी फोन आते रहे तो उठकर आना पड़ा, लेकिन पहले भी कभी नहीं देखे। उनसे उम्मीद पूरी थी। उन्होंने मैच जीतने पर खुब तालियां बजाई और जीत की खुशी में नारे लगाए।



उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर विश्वास था कि वह ओलंपिक में जरूर जीतेगा। पहली बार में कुछ तकनीकि कमियां रहीं तो हारने के बाद बेटे का फोन आया तो सिर्फ उन्होंने इतना ही कहा कि मुझे तुझ पर विश्वास है अपना पूरा फोकस लगाकर मुकाबला खेल, हार जीत की चिंता न कर। फतह कर के आ, ऊपर वाला पूरा साथ देगा। आज जब सरबजोत ने अपने पहले ओलंपिक का कांस्य पदक जीता तो उनके पिता शूटिंग अकादमी में उछल पड़े। उनकी आंखें नम दिखाई दी। वह भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि बेटा फतह हुआ।

Olympics: Father did not go to Paris so that son Sarabjot does not get emotional
मनु भाकर और सरबजोत सिंह - फोटो : Twitter

ओलंपिक से पहले सरबजोत पिछले कुछ दिनों से फ्रांस में पसीना बहा रहे थे। खास बात है कि कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियागिताओं में भारत का नाम ऊंचा करने वाले सरबजोत पहली बार ओलंपिक खेल रहे है। अपने पहले मुकाबले में जाने से एक दिन पहले सरबजोत ने अपने माता पिता को धीन गांव में फोन किया।

Olympics: Father did not go to Paris so that son Sarabjot does not get emotional
खुशी मनाते हुए परिवार के सदस्य। - फोटो : संवाद
उन्होंने पिता जतिंदर सिंह से एक मिनट बात की तो माता से दो मिनट बात कर कुशलक्षेम जाना था। इसके साथ ही कहा कि वह मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार हैं और माता पिता का आशीर्वाद चाहते हैं। इसके बाद परिजनों ने आशीर्वाद दिया। 
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Olympics: Father did not go to Paris so that son Sarabjot does not get emotional
खुशी मनाते हुए परिवार के सदस्य। - फोटो : संवाद

पिता अक्सर उनके मुकाबलों को देखने के लिए नहीं जाते
पिता जतिंदर सिंह ने कहा कि बेटा फतह कर। खास बात है कि शूटर सरबजोत के पिता अक्सर उनके मुकाबलों को देखने के लिए नहीं जाते हैं। अमर उजाला से बात करते हुए पिता ने बताया कि शुरुआत के दिनों में वह फरीदाबाद व दिल्ली में बेटे को लेकर प्रतियोगिता खिलाने गए थे।

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Olympics: Father did not go to Paris so that son Sarabjot does not get emotional
सरबजोत सिंह - फोटो : PTI

यहां देखा कि उन्हें देखकर बेटा भावुक हो जाता है। ऐसे में बेटा की हिम्मत बनी रहे इसके लिए उन्होंने एक दिन फैसला लिया कि वह मैच खत्म होने के बाद ही परिणाम बेटे से सुनेंगे। अगर किसी कारण से बेटे के साथ जाना भी हुआ तो वह परिसर के बाहर बैठ जाते हैं।

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