आज हम आपको उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के बारे में एक रोचक कहानी बताने जा रहे हैं। इस कहानी के माध्यम से आप यह जान सकेंगे कि योगी आदित्यनाथ छोटी उम्र में ही अपने कार्यों से लोगों के बीच नायक बन गए थे। बता दें कि योगी ने संन्यासी बनने के बाद पहली बार गोरखनाथ मंदिर के बाहर निकलकर छात्रों का नेतृत्व किया और एसएसपी को फोन कर चेतावनी दे डाली। दूसरी ओर लोगों ने कहना शुरू कर दिया- 'महंत दिग्विजयनाथ ने दोबारा जन्म लिया है।' आगे की स्लाइड्स में पढ़िए पूरी कहानी...
इस खास सबक को कभी नहीं भूले योगी आदित्यनाथ, जानिए 22 साल की उम्र में कैसे संभाला विशाल साम्राज्य
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अवैद्यनाथ के नक्शे कदम पर चलते हुए 22 साल का युवा मंदिर के विशाल साम्राज्य का उत्तराधिकारी बना था। इसके अपने नुकसान और खतरे थे। यह संयोग ही था कि उत्तराधिकारी घोषित होने के महज एक महीने बाद योगी आदित्यनाथ, प्रताप आश्रम के छात्रों के साथ पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध करने के लिए गोरखनाथ मंदिर परिसर से बाहर निकले थे, उस समय महंत अवैद्यनाथ संसद सत्र में शामिल होने के लिए दिल्ली में थे। वह जब भी बाहर रहते थे उस समय वह अपने शिष्यों पर विशेष नजर रखते थे। वह हमेशा योगी के साथ अपने विश्वासपात्रों को रखते थे। वे उनसे कहते थे कि 'छोटका बाबा तनिक उग्र हैं ध्यान रखिए'।
योगी आदित्यनाथ की सीखने की शक्ति और संन्यासी जीवन में ढलने की क्षमता उल्लेखनीय थी, लेकिन वाहन सीखने की उनकी कोशिशों को जल्द ही झटका लगा। एक बार वह जोंगा वाहन चला रहे थे जो एक पेड़ से टकरा गई और योगी बुरी तरह से घायल हो गए। योगी को काफी दिन तक अस्पताल में रहना पड़ा था।
इसी बीच गोरखनाथ मंदिर में रोजाना लगने वाले जनता दरबार को भी योगी ने अपने हाथ में ले लिया था। यह गोरखपुर के लोगों के साथ शुरू हुआ था, लेकिन जैसे ही चर्चाएं फैलने लगीं कि कैसे महंत ने जमीनी विवाद हल कर दिया या चुटकियों में वैवाहिक मामलों का निपटारा हो गया। लोग दूर-दूर से अपनी समस्याओं के अंबार लेकर वहां पहुंचने लगे। गोरखनाथ मंदिर में कोई भी अपने प्रार्थनापत्र के साथ पहुंच सकता था।
गोरक्षपीठ में योगी का जीवन धीरे-धीरे पटरी पर आ रहा था। यद्यपि आदित्यनाथ सुबह साढ़े तीन बजे उठ जाते। अगर कभी उठने में देर हो जाती तो उनके दरवाजे पर बड़े महराज की छड़ी की खटखटाहट सुनाई देने लगती। अवैद्यनाथ मंदिर के भ्रमण के दौरान योगी को अपने साथ रखते और हर शाखा-विद्यालय, कॉलेज, आयुर्वेद अस्पताल, विश्राम गृह, भंडारा आदि की जानकारी देते। भंडारे में दिन में दो बार 500 से अधिक लोगों को भोजन कराया जाता। इसमें मंदिर के कर्मचारियों, भक्तों, आंगुतकों सबका स्वागत है। गोरखपुर मंदिर के भंडारे में योगी ने ऐसा सबक सीखा, जिसे वह जीवन में कभी नहीं भूले।