निर्भया के गुनहगार आखिरकार सात साल, तीन महीने और तीन दिन बाद फांसी पर चढ़ा दिए गए। शुक्रवार तड़के 5:30 बजे सुबह निर्भया के चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया। निर्भया के चारों गुनहगारों अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय शर्मा और पवन गुप्ता सहित छह लोग शामिल थे। इसमें रामसिंह नामक एक शख्स ने जेल में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी और एक नाबालिग को सुधार गृह से रिहा कर दिया गया है।
निर्भया के दोषियों की फांसी के बाद इस गांव में पसरा मातम, पढ़ें क्या है मामला
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पवन का पूरा परिवार दिल्ली में रहता है, मगर उसके कुछ एक रिश्तेदार व पट्टीदार गांव में रहते हैं। पवन के फांसी होने से पूरा गांव गमगीन है। गांव के जनार्दन गोस्वामी ने कहा क्षेत्र के लिए यह दुखद घड़ी है। गांव प्रधान पति संजय कुमार कहते हैं कि निर्भया कांड गांव के माथे पर एक कलंक है। फिर भी गांव के किसी लाल को फांसी की सूचना सभी को गमगीन बना रही है।
संजय गोस्वामी ने कहा जब से यह सूचना मिली थी कि पवन को फांसी होने वाली है, तब से गांव का माहौल गमगीन हो गया था। यहां लोग पवन को बचपन से जानते हैं। जिस आरोप में उसे सजा-ए-मौत हुई है वैसा उसका स्वभाव नहीं था। गांव के पुजारी दयानंद गोस्वामी ने कहा की विधि का विधान टाला नहीं जा सकता है। हालांकि पवन बचपन में बेहद सरल स्वभाव का था।
गांव के सुखई निषाद ने कहा कि पवन को फांसी हो गई है, इसपर किसी को यकीन नहीं हो रहा है। वह किसी के बहकावे में आकर इस कांड में शामिल हो गया था। वह इस स्वभाव का बिल्कुल भी नहीं था। गांव के ही राम दयाल ने कहा कि पवन दिल्ली से जब गांव आता था, तब वह यहां के बच्चों के साथ ही खेलता था। उसके बचपन की यादें इस गांव से जुड़ी हैं।