जिला पंचायत वार्डों के आरक्षण ने भाजपा का चुनावी गणित और समीकरण बिगाड़ दिया है। इससे चिंतित नेताओं का कहना है कि जो सीटें जिताऊ थीं, वह आरक्षित हो गई हैं। अब प्रत्याशी की तलाश नए सिरे से करनी पड़ेगी। आरक्षित सीट पर जीतने वाले प्रत्याशी मिलेंगे या नहीं, इस पर कुछ कह पाना संभव नहीं है।
एक्सक्लूसिव: जिला पंचायत वार्डों के आरक्षण ने बिगाड़ा इस दिग्गज पार्टी का चुनावी गणित, इस चुनौती को लेकर परेशान हैं नेता
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भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मनोज शुक्ला वार्ड नंबर 56 से चुनावी तैयारी में थे। वह पिछला चुनाव मामूली अंतर से हारे थे। पार्टी को उम्मीद थी कि यह सीट इस बार निकल जाएगी, लेकिन आरक्षण ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया। सामान्य रहते हुए भी इस सीट से समाजवादी लोहिया वाहिनी के पूर्व प्रदेश सचिव मंतोष यादव चुनाव जीते थे। अब मुकाबला ओबीसी प्रत्याशियों के बीच होना है। जीत-हार का ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।
भाजपा के जिला महामंत्री सबल सिंह वार्ड नंबर 50 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन सीट ओबीसी के लिए आरक्षित हो गई है। भाजपा के महानगर मंत्री रणविजय सिंह मुन्ना व वनटांगिया गांव के निवर्तमान प्रधान वार्ड नंबर-9 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। मतदाता सूची दुरुस्त कराने का काम भी किया था, लेकिन यह वार्ड एससी के लिए आरक्षित हो गया। अब रणविजय सिंह मुन्ना चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। सहजनवां क्षेत्र से भाजपा नेता परशुराम शुक्ला के बेटे संजय शुक्ला वार्ड नंबर 24 से टिकट मांग रहे थे। यह वार्ड भी आरक्षित हो गया है।
सपा को राहत देने वाला आरक्षण
आरक्षण की जो सूची जारी हुई है, वह सपा को राहत देने वाली है। निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष गीतांजलि यादव की सीट का आरक्षण नहीं बदला है। यह सीट ओबीसी के लिए ही आरक्षित है। इसी तरह मंतोष यादव जिस सामान्य सीट से चुनाव जीते थे, वह ओबीसी के लिए आरक्षित हो गई है। अब मंतोष दोबारा इसी सीट से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।