गोरखपुर में बदलते मौसम के साथ बीमारियों की भी दस्तक बढ़ गई है। डायरिया, कालरा के साथ टाइफायड ने मरीजों की मुसीबत बढ़ा दी है। जिला अस्पताल में बुखार की शिकायत के साथ रोजाना टाइफायड के 20 से 30 मरीज पहुंच रहे हैं। डायरिया के मरीजों को तो भर्ती तक करना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि इस मौसम में विशेष सावधानी बरतें। अगर लापरवाही करते हैं तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
नया संकट: कालरा, डायरिया के साथ टाइफायड ने बढ़ाई परेशानी, जानिए कैसे फैलती है ये बीमारी
जिला अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे 20 से 30 टाइफायड के मरीज
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बताया कि हर 10 में दो से तीन मरीज टाइफायड के मिल रहे हैं। औसतन देखा जाए तो हर दिन 20 से 30 मरीज आ रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां भी टाइफायड के मरीजों की संख्या 30 से 35 के बीच है। इनमें गंभीर श्रेणी के मरीज भी शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें ज्यादातर मरीज शहरी क्षेत्रों के हैं। जबकि कालरा और डायरिया के मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे हैं।
गंदे पानी से फैलता है टाइफाइड
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि टाइफाइड गंदा पानी पीने से फैलता है। कई बार बारिश के मौसम में पीने के पानी में दूषित पानी मिल जाता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही बारिश की वजह से टाइफाइड के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। ब्लड टेस्ट तथा कल्चर के आधार पर इसका पता किया जा रहा है।
डायरिया, कालरा की वजह दूषित खाना और गंदा पानी
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि डायरिया दूषित खाना खाने के साथ गंदा पानी पीने से भी फैलता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ की वजह से डायरिया और कालरा के मरीज सामने आ रह हैं। इनमें ऐसे मरीज अधिक हैं, जिनकी स्थिति ज्यादा खराब है। इन मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती तक करना पड़ रहा है।
टाइफाइड के लक्षण
पीड़ित व्यक्ति के सिर में दर्द होता है।
शरीर में दर्द, कमजोरी के साथ दस्त की समस्या।
102 से 104 डिग्री तक बुखार रहता है।
बड़े में कब्ज तथा बच्चों में दस्त हो सकता है।