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दवा व्यापारियों की चिंता बढ़ी: अप्रैल-मई में जो दवाएं खोजे नहीं मिल रही थीं, अब उन्हें कोई पूछने वाला नहीं
Wed, 09 Jun 2021 12:15 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 09 Jun 2021 12:15 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
अप्रैल-मई माह में जब कोरोना की दूसरी लहर चरम पर थी तो गोरखपुर जिले के लोग 10 करोड़ रुपये की आइवरमेक्टिन, विटामिन सी, एचसीक्यू और फेबिफ्लू जैसी दवाएं खा गए। सबसे अधिक मांग विटामिन सी की रही। मांग को देखते हुए दवा व्यापारियों ने इन दवाओं को काफी मात्रा में खरीद लिया। अब जबकि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के नए निर्देशों के बाद इन दवाओं को कोरोना के इलाज से हटा दिया गया है तो दवा व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। उनके लाखों रुपये फंस गए हैं। संक्रमण की रफ्तार कम होने के साथ इन दवाओं की मांग कम हो गई थी। अब इलाज के प्रोटोकॉल से बाहर होने के बाद तो इन्हें कोई पूछने वाला नहीं है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय उपाध्याय बताते हैं कि अप्रैल-मई में फेबिफ्लू और आइवरमेक्टिन की मांग ऐसी थी कि यह मिल नहीं रही थी। मांग को देखते हुए भालोटिया मार्केट के दवा व्यापारियों ने करोड़ों रुपये की दवाएं मंगवा ली। अप्रैल और मई माह में दोनों दवाएं करीब चार करोड़ रुपये के आसपास बिकी होंगी। एचसीक्यू और जिंक को मिलाकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की दवा लोगों ने खा ली। हालांकि, मई के अंत तक इन दवाओं की मांग कम हो गई। हालत यह है कि अब फुटकर व्यापारी थोक व्यापारियों को दवा वापस करने आने लगे हैं।
विटामिन सी
- फोटो : पिक्साबे
विटामिन-सी तो हर घर पहुंची
कोरोना महामारी के बीच सबसे अधिक मांग विटामिन-सी की रही। इसकी मांग अब भी है। दो माह में कम से कम साढ़े चार करोड़ रुपये की विटामिन सी बिकी है। वहीं, अलग-अलग कंपनियों की करीब चार करोड़ रुपये की विटामिन-सी मार्केट में फंसी है। अब तो फुटकर व्यापारी भी पैरासिटामॉल से लेकर विटामिन सी और जिंक जैसी दवाएं थोक व्यापारियों को वापस करने का दबाव बना रहे हैं।
कोरोना महामारी के बीच सबसे अधिक मांग विटामिन-सी की रही। इसकी मांग अब भी है। दो माह में कम से कम साढ़े चार करोड़ रुपये की विटामिन सी बिकी है। वहीं, अलग-अलग कंपनियों की करीब चार करोड़ रुपये की विटामिन-सी मार्केट में फंसी है। अब तो फुटकर व्यापारी भी पैरासिटामॉल से लेकर विटामिन सी और जिंक जैसी दवाएं थोक व्यापारियों को वापस करने का दबाव बना रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
रोक के बाद इन दवाओं की बिक्री पर पड़ेगा असर
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की रोक के बाद अब व्यापारी चिंतित हैं। दवा व्रिकेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने बताया कि करीब 50 लाख के आसपास फेबिफ्लू बाजार में मौजूद है। इसके अलावा विटामिन सी काफी मात्रा में है। करीब दो करोड़ रुपये की आइवरमेक्टिन भी मौजूद है। नए निर्देश के बाद इन दवाओं की बिक्री पर असर पड़ेगा।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की रोक के बाद अब व्यापारी चिंतित हैं। दवा व्रिकेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने बताया कि करीब 50 लाख के आसपास फेबिफ्लू बाजार में मौजूद है। इसके अलावा विटामिन सी काफी मात्रा में है। करीब दो करोड़ रुपये की आइवरमेक्टिन भी मौजूद है। नए निर्देश के बाद इन दवाओं की बिक्री पर असर पड़ेगा।
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रेमडेसिविर दवा
- फोटो : अमर उजाला।
लाखों रुपये के रेमडेसिविर भी फंसे
संजय उपाध्याय बताते हैं कि अप्रैल और मई माह में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग अधिक रही। इस वक्त मार्केट में करीब 35 लाख रुपये के इंजेक्शन फंस गए हैं। जबकि इस इंजेक्शन की एक्सपायरी डेट एक से दो माह की है। दवा कंपनी इसे वापस भी नहीं मंगवा रही है।
संजय उपाध्याय बताते हैं कि अप्रैल और मई माह में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग अधिक रही। इस वक्त मार्केट में करीब 35 लाख रुपये के इंजेक्शन फंस गए हैं। जबकि इस इंजेक्शन की एक्सपायरी डेट एक से दो माह की है। दवा कंपनी इसे वापस भी नहीं मंगवा रही है।