मार्च महीने का पहला प्रदोष व्रत 10 मार्च को रखा जाएगा, जबकि 11 मार्च को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। बुधवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है।
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भगवान शिव की प्रतिमा।
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इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस व्रत को रखने से दो गायों के दान के बराबर फल मिलता है।
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भगवान शिव
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पंडित अरविंद गिरी के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन शिव पुराण और भगवान शिव के मंत्रों का जाप किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत रखने से भक्त पर हमेशा भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। साथ ही व्रती की दुख और दरिद्रता दूर होती है।
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भगवान शिव का जलाभिषेक
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प्रदोष व्रत पूजा विधि
पंडित अरविंद गिरी ने बताया कि प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है। इसे प्रदोष काल कहा जाता है। इस दौरान स्नान के बाद पूजा के लिए बैठें।
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भगवान शिव की आराधना करते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव और माता पार्वती को चंदन, पुष्प, अक्षत, धूप, दक्षिणा और नैवेद्य अर्पित करें। महिलाएं मां पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग का सामान चढ़ाएं। मां पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करना शुभ माना जाता है।