दिल्ली, केरल और हैदराबाद में मिले डेंगू के तीन स्ट्रेन पूर्वांचल में भी मिले हैं। इसमें डेंगू के 1, 2 और 3 स्ट्रेन शामिल हैं। डेंगू- दो के स्ट्रेन ने सबसे अधिक पूर्वांचलवासियों को परेशान किया है। यह तथ्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्थित क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) के शोध में सामने आया है। शोध आरएमआरसी की वैज्ञानिक डॉ. हीरावती और उनकी टीम ने किया है। शोध पत्र अमेरिका के जर्नल ऑफ मेडिकल वायरोलॉजी में प्रकाशित भी हो चुका है। शोध के नतीजों के आधार पर टीका बनाने की दिशा में काम भी चल रहा है।
अमर उजाला खास: दिल्ली, केरल-हैदराबाद में मिले डेंगू के तीन स्ट्रेन पूर्वांचल में भी, अलर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीन अस्पतालों से लिए गए थे नमूने
डेंगू के बदलते स्वरूप की वजह से अब तक कोई टीका नहीं बनाया जा सका है। पूर्वांचल में डेंगू के मरीज हर साल मिलते हैं। इन मरीजों पर शोध का फैसला आरएमआरसी ने लिया। इसके बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय में इलाज कराने आए 322 डेंगू मरीजों के नमूने लिए गए। इन नमूनों की जांच पहले एंटीजन से की गई। सभी की रिपोर्ट पॉजिटव आई।
इसके बाद आरटीपीसीआर (रीयल टाइम पॉलिमरेज चेन रियेक्शन) से जांच हुई तो 210 नमूने पॉजिटिव मिले। इन पर शोध हुआ तो पता चला कि अधिकांश मामले डेंगू-2 स्ट्रेन से जुड़े हैं। इसके अलावा डेंगू-1 व 3 के स्ट्रेन भी मिले। यह नमूने 2015 से 2018 के बीच लिए गए थे। शोध के निष्कर्ष 2020 में आए हैं। अब शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हुआ है। उम्मीद जगी है कि डेंगू का टीका विकसित किया जा सकता है।
इन जिलों के मरीजों के लिए गए थे सैंपल
आरएमआरसी की वैज्ञानिक डॉ. हीरावती ने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय गोरखपुर में कई जिलों के डेंगू पीड़ित आते हैं। गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, संतकबीरनगर, कुशीनगर, महराजगंज के मरीजों की संख्या ज्यादा होती है। बिहार के पूर्वीं चंपारण, गोपालगंज, सिवान और नेपाल के मरीज भी यहां इलाज कराने के लिए आते हैं। इन सभी के नमूने लिए गए थे।
पहली बार खतरा बेहद कम, दूसरी बार जानलेवा
डॉ. हीरावती ने बताया कि पहली बार डेंगू होने पर ठीक होने के चांस 90 प्रतिशत रहते हैं। लेकिन जब वायरस के स्वरूप में बदलाव होता है तो वह दूसरे स्ट्रेन के रूप में शरीर में प्रवेश करता है। यह जानलेवा साबित होता है। डेंगू-1 के बाद अगर डेंगू-2 व 3 शरीर में प्रवेश करते हैं तो जान जा सकती है। इस तरह के तमाम मामले सामने भी आए हैं।