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राम जन्म भूमि से गोरक्षपीठ का है गहरा नाता, इन महंतों ने निभाई है खास भूमिका

Thu, 06 Aug 2020 01:49 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 06 Aug 2020 01:49 PM IST
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Sri Ram Mandir ayodhya ram janmabhoomi connected to gorakhnath temple Special story
गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ, महंत अवैद्यनाथ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।

राम जन्म भूमि आंदोलन से गोरक्षपीठ का गहरा नाता रहा है। बात 1949 की है। अयोध्या में मानस यज्ञ प्रारंभ हुआ। इसमें प्रदेश हिंदू महासभा के अध्यक्ष के रूप में गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ ने भाग लिया था।

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महंत दिग्विजय नाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

यज्ञ में जन्म भूमि के उद्धार के लिए 1108 नवाह्न पाठ का संकल्प लिया गया। इससे पहले राम चंद्र परमहंस सहित अन्य महात्माओं ने उस स्थान की सफाई की। 22 एवं 23 दिसंबर की रात में भगवान श्रीराम का प्राकट्य हुआ।

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महंत अवैद्यनाथ की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।

18 जून 1984 को लक्ष्मण किला अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की बैठक हुई। गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ के नेतृत्व में राम जन्म भूमि को मुक्त कराने के लिए 21 जुलाई 1984 को रामजन्म भूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन किया गया। उसके अध्यक्ष महंत अवैद्यनाथ बनाए गए, जो जीवन पर्यंत बने रहे। उनके नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन आगे बढ़ता रहा।

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महंत अवैद्यनाथ की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।

9 नवंबर 1989 को राम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए देश के प्रत्येक गांव से पूजित राम शिलाएं एवं प्रत्येक हिंदू से सवा रुपये लेने का प्रस्ताव पास हुआ। शिला पूजन के लिए आयोजित देश भर में अनेक सभाओं को महंत अवैद्यनाथ ने संबोधित किया।

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श्रीराम मंदिर की खुशी में दीपक जलाकर उत्सव मनाते मंदिर लोग। - फोटो : अमर उजाला।

10 नंवबर 1989 को वर्तमान गर्भ गृह से 192 फिट दूर बिहार के दलित कामेश्वर चौपाल से पहली ईंट रखवा दी गई। अब जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। गोरखनाथ मंदिर से इतने करीब रिश्तों के कारण वहां से जुड़ा हर आदमी भूमि पूजन के अवसर पर खासा प्रसन्न नजर आया।

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