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तस्वीरें: यूपी के इस गांव में 450 मगरमच्छों के साथ रहते हैं इंसान, देखने के लिए विदेशों से आते हैं लोग

Sat, 03 Jul 2021 05:35 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, महराजगंज।
अमर उजाला ब्यूरो, महराजगंज। Published by: vivek shukla Updated Sat, 03 Jul 2021 05:35 PM IST
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दर्जीनिया ताल। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश में एक ऐसा गांव है, जहां इंसानों के साथ मगरमच्छ भी रहते हैं। इन्हें देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। इस गांव में पर्यटन के अनगिनत रंग बिखरे हैं। यहां मगरमच्छों को अठखेलियां करते हुए कभी भी देखा जा सकता है। महराजगंज जिला मुख्यालय के अंतिम छोर पर बसा गांव भेड़िहारी का कटान टोला जहां आदमी के साथ मगरमच्छ भी रहते हैं। चारों ओर से जंगलों से घिरे इस गांव से सटे एक ताल में करीब 450 मगरमच्छ रहते हैं। जिन्हें सुबह शाम आसानी से देखा जा सकता है। ताल में निर्मित टीलों पर अपने बच्चों के साथ खेलते व झुंडों में मगरमच्छ लुभावने लगते हैं। जब मगरमच्छ अपने शिकार के लिए टीलों से पानी में छलांग लगाते हैं, तो नजारा देखते ही बनता है। बताया जाता है कि यहां किसी मगरमच्छ को इंसानों से दिक्कत नहीं है। दोनों अपना-अपना जीवन साथ बीता रहे हैं। एक ताल के अंदर और एक ताल के बाहर। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें ...

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दर्जीनिया ताल। - फोटो : अमर उजाला।
दरअसल, नेपाल राष्ट्र के हिमालय पर्वत की चोटियों से निकली नारायणी नदी के तट एवं सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत निचलौल रेंज के मनोरम वादियों के बीच स्थित दर्जीनिया ताल तेजी से विकसित हो रही है। दर्जीनिया ताल मतलब मगरमच्छों का बसेरा है, जहां पर्यटन के अनगिनत रंग बिखरे हैं।
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दर्जीनिया ताल। - फोटो : अमर उजाला।
चहुओर फैली हरियाली और नारायणी की लहरों के मधुर स्वरों के बीच जंगलों से घिरे ताल में अगर आपको एक साथ एक दो नहीं बल्कि दर्जनों मगरमच्छ दिख जाए, तो आपकी यात्रा का आनंद शायद दोगुना हो जाएगा।
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दर्जीनिया ताल। - फोटो : अमर उजाला।
दर्जीनिया पर पर्यटकों का घूमने का सही समय
दर्जीनिया ताल घूमने और मगरमच्छों को आसानी से घंटों तक देखने के लिए नवंबर से मार्च का महीना सबसे बेहतर माना जाता है। ठंड के दौरान मगरमच्छ ज्यादातर समय रेस्टिंग आइलैंड पर बिताते हैं।
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दर्जीनिया ताल। - फोटो : अमर उजाला।
मगरमच्छ-घड़ियाल का नजारा देख लुप्फ उठाते हैं पर्यटक
मगरमच्छों का प्रज्जनन केंद्र के नाम से विख्यात दर्जीनिया ताल के निकट नारायणी नदी की तट है। जिसके कारण यहां मगरमच्छ-घड़ियाल दोनों देखकर पर्यटक लुप्फ उठाते हैं। नारायणी नदी के तट के किनारे वन विभाग ने एक रेस्ट हाउस भी बना रखा है। जहां पर दूर दराज के पर्यटक अपने परिवार तथा दोस्तों के साथ ठहरकर मनोरम वादियों का आनंद लेते हैं। वहीं नदी के दूसरी छोर पर स्थित सोहगीबरवा गांव की टापू भी दिखाई देता है।
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