दुर्गा मां का वाहन सिंह है लेकिन इस नवरात्रि में उनका आगमन घोड़े पर होगा। हर साल नवरात्रि पर देवी अलग-अलग वाहन से धरती पर आती हैं। नवरात्रि की शुरुआत शनिवार से हो रही है। यह जानकारी नगर के रामलीला मैदान स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी पं. राकेश शास्त्री ने देते हुए बताया कि नवरात्रि का पहला दिन शनिवार होने के कारण मां दुर्गा घोड़े की सवारी करते हुए पृथ्वी पर आएंगी। जब मां दुर्गा की सवारी घोड़ा रहता है। तब पड़ोसी देशों से युद्ध, गृह युद्ध, आंधी-तूफान और सत्ता में उथल पुथल जैसी गतिविधियां बढ़ने की आशंका रहती है। साथ ही नवरात्रि का आखिरी दिन रविवार होने से देवी भैंसे पर सवार होकर जाएंगी। इसके अशुभ फल के अनुसार देश में रोग और शोक बढ़ने की आशंका है।
Navratri 2020: नवरात्रि में घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, जानिए क्या है इसमें खास
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किस दिन कौन सी देवी का होगा पूजन
पहले दिन 17 अक्तूबर मां शैलपुत्री पूजा घटस्थापना, दूसरे दिन 18 अक्तूबर मां ब्रह्मचारिणी पूजा, तीसरे दिन 19 अक्तूबर मां चंद्रघंटा पूजा, चौथे दिन 20 अक्तूबर मां कुष्मांडा पूजा, पांचवें दिन 21 अक्तूबर मां स्कंदमाता पूजा, छठवें दिन 22 अक्तूबर षष्ठी मां कात्यायनी पूजा, सातवें दिन 23 अक्तूबर मां कालरात्रि पूजा, आठवें दिन 24 अक्तूबर मां महागौरी दुर्गा पूजा और नौवें दिन 25 अक्तूबर मां सिद्धिदात्री पूजा की जाएगी।
नवरात्रि में हर दिन का शुभारंभ मुहुर्त
पं. राकेश शास्त्री ने बताया कि इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में नवरात्रि शुरू हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना शुभ मुहूर्त में होगी। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बेहद शुभ माना जाता है, जो पूजा उपासना में अभीष्ट सिद्धि देगा। साथ ही दशहरे तक खरीदारी के लिए त्रिपुष्कर, सौभाग्य और रवियोग जैसे खास मुहूर्त भी रहेंगे। इन शुभ संयोग में प्रॉपर्टी, व्हीकल, फर्नीचर, भौतिक सुख सुविधाओं के सामान और अन्य तरह की मांगलिक कामों के लिए खरीदारी करना शुभ रहेगा।
एक ही दिन 24 अक्तूबर को रहेगा अष्टमी और नवमी
पं. राकेश शास्त्री ने कहा कि 17 अक्तूबर से नवरात्रि शुरू हो जाएगी। इसी दिन प्रतिपदा यानी पहली तिथि में घट स्थापना होगी, इसके बाद 18 को नवरात्रि का दूसरा दिन 19 को तीसरा, 20 को चौथा, 21 को पांचवां, 22 छठा, 23 को सातवां दिन रहेगा। 24 तारीख को सूर्योदय के वक्त अष्टमी और दोपहर में नवमी तिथि रहेगी। इसलिए धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार अगले दिन शाम के समय यानी विजय मुहूर्त में दशमी तिथि होने से 25 अक्तूबर को दशहरा पर्व मनाना चाहिए।
पंडित राकेश शास्त्री ने बताया कि लाल चुनरी, आम के पत्ते, लाल वस्त्र, मौली, श्रृंगार का सामान, दीपक, घी तेल, लंबी बत्ती के लिए रुई या बत्ती, धूप, अगरबत्ती, माचिस, चौकी, चौकी के लिए लाल कपड़ा, नारियल, दुर्गा सप्तशती किताब, कलश, साफ चावल, कुमकुम, फूल, फूलों का हार, चालीसा व आरती की किताब, देवी की प्रतिमा या फोटो, पान, सुपारी, लाल झंडा, लौंग, इलायची, बताशा या मिसरी, कपूर, उपले, फल, मिठाई, कलावा, मेवे की खरीदारी जरूर कर लें।