पड़ोसी बिहार प्रांत के वाल्मीकि टाईगर रिजर्व के मदनपुर जंगल में विख्यात देवी मंदिर नेपाल, बिहार और यूपी के लाखों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र रहा है। यहां रहसू गुरू नाम के देवी भक्त मां के कृपा से बाघों के गले में सांप की रस्सी लपेट दवंरी कराने की कथा प्रचलित है। लॉकडाउन के चलते मंदिर में दर्शनार्थी कम पहुंच रहे हैं फिर भी लोगों में देवी मंदिर के प्रति आस्था रत्ती भर कम नहीं हुई है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में स्थापित है ये मंदिर, इसकी कहानी जानकर रोमांचित हो जाएंगे आप
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मंदिर के बारे में प्रचलित है किंवदंती
मदनपुर देवी स्थान जहां मौजूद है, वहां घनघोर जंगल था तथा राजा मदन सिंह नाम के राजा के राज्याधीन था। एक बार जंगल में शिकार करने राजा पहुंचे तो उनको पता चला कि एक रहसू गुरू साधु उनके इन जंगलों के बीच बाघों के गले में सांप बांधकर पतहर (खर पतवार) की मड़ाई (दंवरी) करता है और उसमें से कनकजीर (सुगंधित धान कि प्रजाति) निकलता है।
राजा को घोर आश्चर्य हुआ, सच्चाई जानने के लिए राजा सैनिकों के साथ मौके पर पहुंचे तो नजारा देख अचम्भित हो गए। राजा ने हठ करते हुए साधू से देवी जी को बुलाकर दिखाने का आदेश सुनाया। साधू ने राजा को समझाते हुए कहा कि ऐसी जिद्द न करें बेवजह देवी मां को बुलाना संकट को मोल लेना होगा, देवी कुपित हुई तो आपके राजपाट का सर्वनाश हो जाएगा। समझाने के बाद भी राजा मदन जिद्द पर अड़े रहे, जब साधू के जान पर बन आई तो भारी मन से देवी का आह्वावन किया। कहा जाता है जगदंबा असम के कामख्या से चली और खंहवार नामक स्थान पर पहुंची , वहां से थावें पहुंची (दोनों जगह मंदिर स्थापित है)।
देवी के आने से पहले साधू ने राजा को फिर चेताया लेकिन राजा नहीं माने इसके बाद अचानक भक्त रहसू का सीर फटा और देवी मां का हाथ उसके बाहर दिखाई दिया। देवी के तेज को सहन नहीं कर पाए राजा और जमीन पर गिर पड़े फिर कभी नहीं उठे। बाद में राजा का परिवार व सारा साम्राज ही तहस नहस हो गया। देवी मां जमीन में समां गईं और यहां पिंडी के रूप में स्थापित हो गई। धीरे-धीरे यह स्थान घनघोर जंगल से घिर गया। कालांतर में हरिचरण नामक व्यक्ति की नजर पिंडी पर पड़ी। उसने देखा कि एक गाय पिंडी पर अपना दूध गिरा रही है उन्होंने पिंडी के आसपास के सफाई कर पूजा करना शुरू कर दिया।
वाइल्ड लाइफ के कड़े कानून पर भी आस्था पड़ती है भारी
जहां देवी मंदिर स्थापित है, वह इलाका वाल्मिकी टाइगर रिजर्व के अधीन है। वहां कानून के मुताबिक किसी भी प्रकार के धार्मिक गतिविधि व शोर वर्जित है परंतु मंदिर के प्रसिद्धि व लोक आस्था को देखते हुए प्रशासन ने नरमी अपनाकर तमाम धार्मिक गतिविधियों के आयोजन की अनुमति दे रखी है।