झोपड़ी से शुरू होने वाला चर्च अब शहर की शान बन गया है। लोग इस चर्च के भव्यता के कारण इसे बड़े चर्च के नाम से पुकारते हैं। हम बात कर रहे हैं शहर के मेडिकल कॉलेज रोड के बशारतपुर मोहल्ले में स्थित सेंट जॉन चर्च की।
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सेंट जॉन चर्च
- फोटो : अमर उजाला।
इस चर्च को वर्ष 1823 में झोपड़ी में स्थापित किया गया था। बाद में चर्च खपरैल में स्थापित हो गया। लगभग दो दशक पूर्व यहां खूबसूरत दो मंजिल का प्रेयर हॉल और चर्च बना। वर्तमान में चर्च का खूबसूरत भवन एवं विभिन्न रंग एवं भिन्न भिन्न प्रकार के फूलों से युक्त परिसर यहां आने वालों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
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सेंट जॉन चर्च
- फोटो : अमर उजाला।
ये है चर्च का इतिहास
सेंट जॉन चर्च के पुरोहित रेव्ह रौशन लाल ने बताया कि इस चर्च का निर्माण मिशनरी एसोसिएशन के माइकल विलकिंसन ने कराया। तत्कालीन कलेक्टर राबर्ट मार्टिनस बर्ड ने इसके लिए आर्थिक सहायता दी। गवर्नर जनरल लार्ड विलियम वेंटिक ने मिशनरी एसोसिएशन के सामाजिक कार्यों को देखते हुए वर्ष 1931 में चर्च के निर्माण के लिए 1500 एकड़ जमीन इस शर्त पर दी कि जमीन को उपजाऊं बनाकर खेती की जाए।
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सेंट जॉन चर्च
- फोटो : अमर उजाला।
पहले यहां विशाल जंगल हुआ करता था। मिशनरी एसोसिएशन और आसपास के लोगों ने करीब 600 एकड़ जमीन की साफ-सफाई कर इसे खेती योग्य बनाया। यहां पर स्थित पोखरे के चारों ओर समाज के लोगों ने झोपड़ी डाल ली और रहने लगे।
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सेंट जॉन चर्च।
- फोटो : अमर उजाला।
चर्च में लगा है 500 किलो का घंटा
मसीही सेवक वीपी अलेक्जेंडर ने बताया कि चर्च की भव्यता को और बढ़ाने के लिए छह वर्ष पूर्व यहां पांच सौ किलो का घंटा लगाया गया। इसका उपयोग चर्च में प्रार्थना व अन्य सूचनाओं को देने के साथ ही श्रद्धालुओं को आमंत्रित करने के लिए किया जाता है। इससे निकलने वाली आवाज करीब तीन किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है।