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श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को धार देने में लगा दी जवानी, मंदिर देखने की हसरत रह गई अधूरी

Mon, 03 Aug 2020 11:28 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 03 Aug 2020 11:28 AM IST
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Special story of Sri Ram Mandir ayodhya ram janmabhoomi Movement
राम मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

अयोध्या में श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को होने वाले शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर पूरा देश उत्साहित है। गोरक्षनगरी में भी दीप जलाकर स्वागत की तैयारियां चल रही हैं। लेकिन मंदिर निर्माण के लिए चले लंबे आंदोलन में अपनी जवानी लगा देने वाले बहुत कारसेवक व आंदोलनकारी ऐसे हैं जो अब गोलोकवासी हो चुके हैं, उनके मंदिर देखने की हसरत अधूरी ही रह गई।

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विहिप का राममंदिर का मॉडल - फोटो : अमर उजाला

मंदिर आंदोलन को धार देने वाले विश्व हिंदू परिषद के विभाग अध्यक्ष नागेंद्र सिंह उर्फ दाढ़ी बाबा, आरएसएस के प्रचारक विजय नारायण द्विवेदी, डॉ. चक्रपाणि शुक्ला, रामसूरत मल्ल सहित बहुत सारे ऐसे नाम हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उस दौरान उनकी सक्रियता की चर्चा रामभक्त आज भी करते हैं। ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के निर्देशन में वे सभी गांव-गांव अभियान चलाकर जनमत एकत्र किया। उस दौरान श्रीराम मंदिर आंदोलन के कर्ताधर्ता में प्रमुख भूमिका निभाने वाले विहिप जिला संगठन मंत्री बृजेश त्रिपाठी, विभाग संगठन मंत्री संजय श्रीवास्तव, किराना व्यवसायी जगदीश गुप्ता ने कुछ ऐसे ही रामभक्तों की स्मृतियां साझा की हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।

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राम मंदिर। - फोटो : Social Media

रामभक्तों का निशुल्क इलाज करते थे डॉ. चक्रपाणि
विश्व हिंदू परिषद में सन 1985 से 1992 तक महानगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले पेशे से चिकित्सक डॉ. चक्रपाणि शुक्ला के राम मंदिर आंदोलन में योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। वे आंदोलन में अपनी सक्रियता तो रखते ही थे कारसेवकों, राम भक्तों, विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का नि:शुल्क इलाज भी करते थे। उनका सरल व्यवहार ही था कि डॉक्टर होते हुए भी कार्यकर्ताओं में बहुत लोकप्रिय थे।

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राम मंदिर के लिए तराशे गए पत्थर - फोटो : amar ujala

कारसेवकों में काफी लोकप्रिय थे दाढ़ी बाबा
सरस्वती विद्या मंदिर आर्यनगर उत्तरी के प्रधानाचार्य रहे स्व. नागेंद्र सिंह उर्फ दाढ़ी बाबा कारेसवेकों में काफी लोकप्रिय थे। सन 1991 से 1997 तक विश्व हिंदू परिषद गोरखपुर विभाग के अध्यक्ष का दायित्व संभाला। यह, वह दौर था जिस वक्त पूरा देश मंदिर आंदोलन की राह पर था। उन दिनों दाढ़ी बाबा का विद्या मंदिर आंदोलन का प्रमुख केंद्र था। हिंदू संगठनों की गतिविधियों में दाढ़ी बाबा ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सरस्वती विद्या मंदिर में गोपनीय कार्यालय था जहां बैठकें होती थी। कारसेवकों के विश्राम की व्यवस्था, विहिप व बजरंग दल का सहयोग वे आजीवन करते रहे। दाढ़ी बाबा कहते थे, जीवन की एक ही इच्छा है कि श्रीराम मंदिर को देखूं और वहां उपासना करूं।

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Ayodhya - फोटो : अमर उजाला

विजय नारायण ने संभाली थी पहले संकल्प सभा की कमान
7 अक्टूबर 1984 को अयोध्या के सरयू तट पर होने वाली पहली संकल्प सभा से ही मंदिर आंदोलन की कमान संभाली थी। विहिप प्रमुख अशोक सिंघल ने उन्हें संगठन के भीष्म की संज्ञा दी थी। चौरीचौरा के ब्रहमपुर निवासी विजय नारायण द्विवेदी ने 16 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में सामाजिक जीवन प्रारंभ किया। मंदिर निर्माण आंदोलन के समय विहिप गोरखपुर संभाग के संगठन मंत्री थे। प्रदेश में निकलने वाली तीन रथ यात्राओं में गोरखपुर संभाग में चलने वाली श्रीराम जानकी रथयात्रा के प्रमुख रहे। पिपराइच में दंगे के बाद जब रथ को जिला प्रशासन ने रोक दिया था, हिंदुओं का जन सैलाब उमड़ पड़ा। देवरिया जिले में रथयात्रा के स्वागत में 27 किलोमीटर की लंबी लाइन लगी थी, जिसकी चर्चा उन दिनों बीबीसी न्यूज ने भी किया था।

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