यह बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि जिस 120 वर्ष पुराने भवन में आज गोरखपुर रेल म्यूजियम है, वह कभी बंगला नंबर पांच होता था। सड़क के किनारे और गोल्फ मैदान के पास होने के चलते बंगला नंबर पांच की बहुत मांग रहती थी।
120 वर्ष पुराने भवन में है गोरखपुर रेल म्यूजियम, जानिए क्या है इसकी अनोखी गाथा
जानकारों के मुताबिक भवन का निर्माण 1890 और 1900 के बीच हुआ। भवन को बनाने के लिए पश्चिम बंगाल से ईंटें मंगाई गई थीं। म्यूजियम की नींव नौ अप्रैल, 2005 को तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रखी थी।
रेल की विरासत को किया गया है संरक्षित
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने रेल विरासतों के महत्व की सामग्रियों को संरक्षित करने तथा धरोहरों को आने वाली पीढ़ी से परिचित कराने के लिए शहर के बीच में रेल म्यूजियम की स्थापना की है।
यहां रखा गया है पूर्वोत्तर रेलवे का पहला इंजन
रेल म्यूजियम में पूर्वोत्तर रेलवे का पहला इंजन लार्ड लारेंस लोगों को आकर्षित करता है। इस इंजन का निर्माण लंदन में 1874 में डब्स कंपनी ने की थी। लंदन से इंजन को बड़ी नाव से कोलकाता तक लाया गया था।
दस्तावेजों के मुताबिक उत्तर बिहार में जबरदस्त अकाल के दौरान राहत पहुंचाने के लिए वाजितपुर से दरभंगा के बीच महज 60 दिनों में 51 किमी रेल लाइन बिछाई गई थी। उसी रेल लाइन पर लार्ड लारेंस इंजन 15 अप्रैल, 1874 को राहत सामग्री लेकर दरभंगा पहुंचा था।