उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की डॉ. मीता अग्रवाल को अपने सुसर गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति प्रो. राम अवतार अग्रवाल से बागवानी का शौक विरासत में मिला है। इसी का नतीजा है कि जेल रोड के पास 21 हजार स्क्वायर फीट में फैले उनके घर का तकरीबन 50 फीसदी हिस्से बागवानी को समर्पित है।
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डॉ. मीता के गार्डेन में बॉटल पाम, शमी, गुलाब, गेंदा, लिली, चंपा, चमेली, रातरानी, मोरपंखी, गिलोय, एलोवेरा, बर्ड ऑफ पैराडाइज, आम में आम्रपाली, कपूरी, दशहरी, अंजीर, चीकू, केला, पनियाला, तुलसी, नीम, नींबू, बांस, अशोक के पेड़ और इलायची के पौधों की कई प्रजातियां मौजूद हैं। पौधों के लिए जैविक खाद वह अपनी देखरेख में तैयार कराती हैं। बागवानी में पति डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल भी उनका भरपूर साथ निभाते हैं।
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डॉ. रीना के लिए पौधों के देखरेख से जुड़ी हर जानकारी अहम
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बीआरडी मेडिकल के प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त डॉ. रीना श्रीवास्तव व्यस्तता के बीच बागवानी के लिए समय निकाल लेती हैं। पौधों की देखभाल में कोई कमी न रह जाए। इसके लिए बागवानी से जुड़ी किताबों और अन्य जगहों से जानकारी एकत्र करती हैं। डॉ. रीना ने कैंट थाने के पास आवास में 1200 स्क्वायर फीट का सुंदर लॉन तैयार किया है। पति डॉ. राजेश श्रीवास्तव भी हाथ बटाते हैं। उनके गार्डन में एक तरफ आम, अमरूद, अनार, नींबू के विभिन्न प्रजातियां हैं। तो सजावटी पौधे और मौसमी फूल गार्डन की सुंदरता बढ़ाते हैं।
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रचना को 'ठाकुर जी गार्डन' में मिलता है सुकून
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व्यवसायी आशीष दास की पत्नी रचना दास को घर में हरियाली न होने की कमी महसूस हुई, तो छत पर टैरेस गार्डन तैयार कर डाला। शेखपुर स्थित आवास में रचना ने 400 से अधिक गमलों में
गुलाब, कैक्टस, गुड़हल, बेला, कनेर, लिली, क्रोटन के साथ साथ सजावटी और औषधीय पौधे लगाए हैं। रचना ने बगिया का नाम ठाकुर जी गार्डेन रखा है। इसके लिए वह रोजाना दो घंटे का समय निकालती है। उनका कहना है कि बागवानी से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
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अंकिता की रुचि पढ़ाई के साथ बागवानी में भी
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इलाहीबाग में रहने वाली और इस्लामिया कॉलेज ऑफ कॉमर्स में बीकॉम तृतीय वर्ष की छात्रा अंकिता श्रीवास्तव की रुचि पढ़ाई के साथ ही साथ बागवानी में भी है। उन्होंने घर में छोटे-बड़े करीब डेढ़ सौ गमलों में गुलाब, गुड़हल, चाइनीस पाम, बेला, कोरियाग्रास, लक्ष्मण बूटी जैसे अलग-अलग किस्म के पौधे लगाए हैं। ये पौधे बालकनी, छत और बरामदे की शोभा बढ़ाते हैं। परिवार के लोग भी इस काम में भरपूर सहयोग करते हैं।