महराजगंज जिले के मिठौरा विकास खंड क्षेत्र के सेखुई गांव में प्राचीन शिव मंदिर स्वतंत्रता आंदोलन और भगवान शिव से जुड़ी इस एक कथा है। यह गांव स्वतंत्रता सेनानियों का गांव कहा जाता है। इस गांव का एक प्राचीन शिव मंदिर भक्तों की अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है।
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- फोटो : अमर उजाला।
इस मंदिर में स्थित शिवलिंग को कभी अंग्रेजों ने हथियार से प्रहार कर तोड़ने की कोशिश की थी। वह भी इसलिए कि वे यहां की स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को पकड़ने आये थे, और असफल रह गए थे। वहीं शिवलिंग तोड़ने में असफल अंग्रेजों के सभी घोड़े गांव से निकलते ही मर जाते थे। जबकि गांव से कुछ ही दूर निकले के बाद एक भी अंग्रेज नहीं बचते थे।
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मंदिर के पुजारी जोगिंदर मिश्र के अनुसार यहां के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को पकड़ने के लिए कुछ अंग्रेज अधिकारी अपनी सेना की एक टुकड़ी के साथ आने वाले थे। लेकिन अंग्रेजों के आने से पहले ही भगवान शिव की महिमा से किसी ने स्वप्न देखा और अंग्रेजों के आने की जानकारी मिल गई।
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इनसे बचने के लिए न केवल सेनानी बल्कि पूरा गांव पलायन कर गया था। सिर्फ चाची की संज्ञा से जानी जाने वाली एक वृद्धा महिला गांव में रह गई थी। अगले दिन अंग्रेज पहुंचे तो गांव को खाली देखकर बूढ़ी महिला से पूछताछ की। साफ दिल की बूढ़ी महिला ने अंग्रेजों से भगवान शिव द्वारा दिखाए गए स्वप्न की कहानी को बता दिया। उसके बाद स्वतंत्रता के आंदोलनकारियों पर जुल्म ढाहने वाले अंग्रेजों ने शिव मंदिर को आग के हवाले कर दिया। इसके पहले उन लोगों ने मंदिर के शिवलिंग पर धारदार हथियार से प्रहार कर तोड़ने का प्रयास किया। शिवलिंग पर प्रहार से टूटे अवशेष के निशान अब भी दिखाई देते हैं।
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मंदिर स्वाधीनता आन्दोलन का बना साक्षी
मान्यता के अनुसार गांव के लोग मंदिर के शिवलिंग को मिट्टी से बांध बनाकर उसमें पानी भरकर शिवलिंग को पूरा डुबो देते हैं। जब भी ऐसा किया गया, तो बारिश जरूर हुई है। ऐसी धारणा व अन्य कई आस्था के साथ सेंखुई का प्राचीन शिव मंदिर लोगों के आस्था का जहां एक केंद्र है। वहीं स्वतंत्रता आंदोलन की घटित एक अद्भुत घटना का साक्षी भी है। स्वतंत्रता दिवस व देश के स्वतंत्रता आंदोलन का जिक्र होने पर यहां के लोग भगवान शिव व अंग्रेजों से जुड़ी इस कहानी को याद करते हैं।