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यूपी: इस थाने को सूट नहीं करता है 'स' से शुरू होने वाले नाम का कोतवाल, खतरनाक है इसकी कहानी

Sat, 12 Dec 2020 01:16 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 12 Dec 2020 01:16 PM IST
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special horror story of Shahpur police station in gorakhpur
कोतवाली शाहपुर। - फोटो : अमर उजाला।
आज हम आपको उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के एक ऐसे थाने के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां छोटी सी चूक बड़ी घटना को दावत देता है। बता दें कि यह थाना 'स' से शुरू होने वाले नाम के कोतवाल की वजह से सुर्खियों में है। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए क्या है पूरा मामला...
special horror story of Shahpur police station in gorakhpur
कोतवाली शाहपुर। - फोटो : अमर उजाला।
हम बात कर रहे हैं जिले के शाहपुर थाने की। एक बार फिर 'स' से शुरू होने वाले नाम के कोतवाल की वजह से यह थाना सुर्खियों में है। माना जाता है कि जब भी यहां पर कोतवाल के नाम की शुरुआत 'स' से होती है तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। ऐसा पहले हुआ भी है और एक बार फिर एक मामला सामने आया है।
special horror story of Shahpur police station in gorakhpur
कोतवाली शाहपुर। - फोटो : अमर उजाला।
ताजा मामला विधायक के भाई और कोतवाल के बीच छिड़ी जंग का है। गाड़ी लड़ने के मामूली विवाद में विधायक के भाई की कथित पिटाई मामले में शाहपुर इंस्पेक्टर सुधीर कुमार सिंह विवादों में घिरे हैं। विभाग में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कई लोग कहते हैं कि शाहपुर में 'स' शब्द ही सूट नहीं करता है।

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कोतवाली शाहपुर। - फोटो : अमर उजाला।
जानकारी के अनुसार, शाहपुर थाना 1980 में बना। तब से 2006 तक वहां नौ लोगों की मौत हुई। थाने के निर्माण में छत की शटरिंग गिरने के दौरान कई मजदूर घायल हो गए थे। इसमें तीन की मौत हो गई थी। थाना बनकर तैयार हो गया पर मौतों का सिलसिला जारी रहा।
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कोतवाली शाहपुर। - फोटो : अमर उजाला।
ज्यादा बवाल तीन मौतों को लेकर हुआ था। 31 जनवरी 2001 को राजेश शर्मा नाम के एक व्यक्ति की पिटाई के बाद लॉकअप में मौत हो गई। तत्कालीन थानेदार संजय सिंह के साथ ही तीन सिपाहियों पर हत्या का केस दर्ज हुआ। शाहपुर थाने के लॉकअप में वर्ष 2006 के बाद से ही कोई बंद नहीं किया जाता है। अनहोनी से बचने के लिए किसी की सलाह से थाने में ही हनुमान मंदिर बना दिया गया।
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