कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण का शिकार हुए लोगों के फेफड़ों के दाग खुद ही बेदाग हो जा रहे हैं। संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बड़ा बदलाव है। 60 से 70 प्रतिशत मरीजों के छाती में बने दाग बिना दवाओं के ही खत्म हो जा रहे हैं। केवल 10 प्रतिशत मरीजों को ही दवाई खानी पड़ रही हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस तरह के प्रतिदिन 50 से 60 मरीज चेस्ट विभाग की ओपीडी में आ रहे हैं।
राहत की खबर: कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के फेफड़ों के दाग खुद हो रहे 'बेदाग', डॉक्टर बोले- इसपर शोध की जरूरत
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ओपीडी में आने वाले मरीजों में 60 से 70 मरीज प्रतिदिन ऐसे आ रहे हैं, जिनके फेफड़ों में संक्रमण के दौरान बड़े दाग उभरकर सामने आए थे। चेस्ट सीटी स्कैन में फाइब्रोसिस की समस्या थी, लेकिन महज एक से डेढ़ माह के अंदर यह दाग बिना दवाओं के इस्तेमाल के ही खत्म हो गए। इस पर जब मरीजों से जानकारी ली गई तो पता चला कि मरीजों ने एक भी दवा नहीं ली है। केवल बेहतर खान-पान और व्यायाम किया है।
ठीक होने में लगे सात से आठ महीने
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि पहली लहर में संक्रमण का शिकार हुए लोग ठीक होने के बाद फेफड़ों की समस्या लेकर सात से आठ महीने तक लगातार आते रहे हैं। इन्हें फाइब्रोसिस की समस्या भी छह से सात माह तक परेशान करती रही है।
लगातार मरीजों को दवाई खानी पड़ी है, जबकि दूसरी लहर में संक्रमण की दर सबसे अधिक थी। फिर भी मरीजों के फेफड़े को ठीक होने में कम समय लगा है। हालांकि, दूसरी लहर में 25 से 30 मरीज ऐसे भी मिले हैं जिनके फेफड़े बदलने तक की नौबत तक आ चुकी है, जबकि पहली लहर में ऐसे मरीज नहीं मिले थे।
पांच प्रतिशत मरीजों को देनी पड़ी है दवा
पांच प्रतिशत मरीजों को खून पतला करने वाली दवा देनी पड़ी है। इसके अलावा फाइब्रोसिस में चलने वाली दवाई भी केवल पांच प्रतिशत मरीजों को दी गई है। बाकी 60 से 70 प्रतिशत मरीज बिना दवाओं के ही ठीक हो गए हैं। इन मरीजों के चेस्ट सीटी स्कैन में फाइब्रोसिस की समस्या एक से डेढ़ माह बाद खुद ही खत्म हो गई है।