गोरखपुर में मरीजों के मिलने की स्थिति ऐसी है कि मात्र छह दिन में करीब चार हजार से अधिक संक्रमित मिल चुके हैं। इसके बाद भी अब तक नए स्ट्रेन की पहचान नहीं हो सकी है। इसकी वजह यह है कि दो बार केजीएमयू में भेजे गए नमूनों की जांच हो ही नहीं सकी। दोनों बार नमूने खराब हो चुके हैं।
मौत की लहर: नए स्ट्रेन का पता लगाने के लिए भेजे गए नमूने हुए खराब, अब दिल्ली में होगी जांच
जानकारी के मुताबिक मार्च के पहले सप्ताह में शासन से पत्र मिलने के बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने 13 मार्च को दो संक्रमितों के नमूने केजीएमयू जांच के लिए भेजे थे। दोनों संक्रमितों के थ्रोट स्वाब के चार नमूने भेजे गए थे।
करीब 15 दिन बाद केजीएमयू प्रशासन ने सूचना दी कि दोनों नमूने खराब हो गए हैं। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने एक बार फिर चार संक्रमितों के नमूने 27 मार्च को जांच के लिए भेजा। दूसरी बार भी केजीएमयू प्रशासन ने नमूने के खराब होने की सूचना दी है।
नए स्ट्रेन का पता लगाने के लिए की जाती है जीन मैपिंग
माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि वायरस के स्ट्रेन का पता जीन मैपिंग के आधार पर किया जाता है। यह सुविधा प्रदेश में लखनऊ के केजीएमयू और वाराणसी के बीएचयू में हैं। इसके अलावा दिल्ली मैक्स में भी यह सुविधा उपलब्ध है। यही वजह है कि दोनों बार नमूने केजीएमयू भेजे गए थे।
माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने कहा कि नए स्ट्रेन का पता लगाने के लिए दो बार नमूने भेजे गए थे। दोनों बार नमूनों की जांच समय से नहीं हो सकी। इसकी वजह से नमूने खराब हो गए। इस बार नमूने दिल्ली भेजे गए हैं। उम्मीद है कि वहां से एक हफ्ते में रिपोर्ट मिल जाएगी। इससे मरीजों की जांच में सुविधा होगी।