कोरोना से मुक्ति के बाद भी लोगों की जान जा रही है। रेजीडुअल डैमेज होने की वजह से कोरोना से जंग जीत चुके छह लोगों की मौत अब तक हो चुकी है। ऐसे में डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि संक्रमण से मुक्त होने के बाद लापरवाही बिल्कुल न बरतें। अगर ऐसा कर रहे हैं तो खतरे को दावत दे रहे हैं। इतना ही नहीं संक्रमण से मुक्त होने के बाद 30 से 40 ऐसे लोग हैं, जो दोबारा संक्रमित भी हो चुके हैं।
कोरोना संक्रमण से मुक्ति के बाद भी जा रही है लोगों की जान, अब डॉक्टर दे रहे ये सलाह
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जानकारी के मुताबिक जिले का पहला संक्रमित बुजुर्ग अप्रैल के अंतिम माह में संक्रमित होने के बाद एक महीने तक बीआरडी में भर्ती रहा। बीआरडी डॉक्टरों ने उसे ठीक करके घर भेज दिया। लेकिन निगेटिव होने के एक महीने बाद उसकी मौत हार्ट अटैक से हो गई।
इसी तरह शहर के झारखंडी मोहल्ले के रहने वाले 59 वर्षीय व्यक्ति जुलाई माह में संक्रमित हुए थे। अगस्त के दूसरे सप्ताह में वह ठीक होकर घर आ गए। अचानक उन्हें दोबारा सांस लेने में तकलीफ हुई तो परिजन तत्काल जिला अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने देखते हुए मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा चार ऐसे लोग हैं, जिनकी मौत निगेटिव होने के बाद हुई है।
रेजीडुअल कर रहा डैमेज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागध्यक्ष डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के बाद लोग लापरवाह हो जा रहे हैं। जबकि यह वायरस आंतरिक अंगों को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। इनमें दिल, फेफड़ा, लिवर व किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंग है। फेफड़ों पर इसका असर काफी लंबे समय तक रहता है। इसे रेजीडुअल डैमेज कहते हैं। यह काफी जानलेवा होता है।
छह महीने तक बरतें विशेष सावधानी
जिला अस्पताल के फिजिशियन व कोरोना योद्धा डॉ राजेश कुमार ने बताया कि निगेटिव होने के बाद भी लोग कम से कम छह महीने तक विशेष सतर्कता बरते। अगर निगेटिव होने के बाद लापरवाही कर रहे हैं, तो ज्यादा खतरनाक है। हर महीने फेफड़े और डी-डाईमर और क्लाटिंग प्रोफाइल की जांच जरूरी है। एंटीक्लाटिंग दवाएं डॉक्टरों के सलाह पर ही लें। तबीयत खराब होती है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।