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कोरोना संक्रमण से मुक्ति के बाद भी जा रही है लोगों की जान, अब डॉक्टर दे रहे ये सलाह

Wed, 02 Dec 2020 09:21 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 02 Dec 2020 09:21 PM IST
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People dying due to residual damage after corona in gorakhpur
कोरोना वायरस। - फोटो : अमर उजाला।

कोरोना से मुक्ति के बाद भी लोगों की जान जा रही है। रेजीडुअल डैमेज होने की वजह से कोरोना से जंग जीत चुके छह लोगों की मौत अब तक हो चुकी है। ऐसे में डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि संक्रमण से मुक्त होने के बाद लापरवाही बिल्कुल न बरतें। अगर ऐसा कर रहे हैं तो खतरे को दावत दे रहे हैं। इतना ही नहीं संक्रमण से मुक्त होने के बाद 30 से 40 ऐसे लोग हैं, जो दोबारा संक्रमित भी हो चुके हैं।

People dying due to residual damage after corona in gorakhpur
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

जानकारी के मुताबिक जिले का पहला संक्रमित बुजुर्ग अप्रैल के अंतिम माह में संक्रमित होने के बाद एक महीने तक बीआरडी में भर्ती रहा। बीआरडी डॉक्टरों ने उसे ठीक करके घर भेज दिया। लेकिन निगेटिव होने के एक महीने बाद उसकी मौत हार्ट अटैक से हो गई।
 

People dying due to residual damage after corona in gorakhpur
कोरोना वायरस। - फोटो : रवि बत्रा

इसी तरह शहर के झारखंडी मोहल्ले के रहने वाले 59 वर्षीय व्यक्ति जुलाई माह में संक्रमित हुए थे। अगस्त के दूसरे सप्ताह में वह ठीक होकर घर आ गए। अचानक उन्हें दोबारा सांस लेने में तकलीफ हुई तो परिजन तत्काल जिला अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने देखते हुए मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा चार ऐसे लोग हैं, जिनकी मौत निगेटिव होने के बाद हुई है।

 

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People dying due to residual damage after corona in gorakhpur
कोरोना वायरस। - फोटो : PTI

रेजीडुअल कर रहा डैमेज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागध्यक्ष डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के बाद लोग लापरवाह हो जा रहे हैं। जबकि यह वायरस आंतरिक अंगों को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। इनमें दिल, फेफड़ा, लिवर व किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंग है। फेफड़ों पर इसका असर काफी लंबे समय तक रहता है।  इसे रेजीडुअल डैमेज कहते हैं। यह काफी जानलेवा होता है।

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People dying due to residual damage after corona in gorakhpur
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTi

छह महीने तक बरतें विशेष सावधानी
जिला अस्पताल के फिजिशियन व कोरोना योद्धा डॉ राजेश कुमार ने बताया कि निगेटिव होने के बाद भी लोग कम से कम छह महीने तक विशेष सतर्कता बरते। अगर निगेटिव होने के बाद लापरवाही कर रहे हैं, तो ज्यादा खतरनाक है। हर महीने फेफड़े और डी-डाईमर और क्लाटिंग प्रोफाइल की जांच जरूरी है। एंटीक्लाटिंग दवाएं डॉक्टरों के सलाह पर ही लें। तबीयत खराब होती है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।

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