देशभर में आज बलिदान दिवस मनाया जा रहा है। स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह को 19 दिसंबर 1927 को फांसी दी गई थी। महानायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल फांसी से ठीक पहले अपनी मां से मिलकर खूब रोए थे।
फांसी से पहले भावुक हो गए थे बिस्मिल, मां से कहा था 'तुमसे बिछड़ने के शोक में हैं ये आंसू'
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की माता मूलरानी ऐसी वीरमाता थीं जिनसे वे हमेशा प्रेरणा लेते थे। शहादत से पहले ‘बिस्मिल’ से मिलने गोरखपुर वे जेल पहुंचीं तो पंडित बिस्मिल की डबडबाई आंखें देखकर भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया।
कलेजे पर पत्थर रख लिया और उलाहना देती हुई बोलीं, ‘अरे, मैं तो समझती थी कि मेरा बेटा बहुत बहादुर है और उसके नाम से अंग्रेज सरकार भी थरथराती है। मुझे पता नहीं था कि वह मौत से इतना डरता है।
उनसे पूछने लगीं, ‘तुझे ऐसे रोकर ही फांसी पर चढ़ना था तो तूने क्रांति की राह चुनी ही क्यों? तब तो तुझे तो इस रास्ते पर कदम ही नहीं रखना चाहिए था।’