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Gorakhpur News: शोध पत्र से थीसिस और पेटेंट तक की बारीकियां सीख रहे प्रतिभागी
Fri, 18 Sep 2026 02:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 18 Sep 2026 02:39 AM IST
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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में चल रही पांच दिवसीय ‘रिसर्च एक्सीलेंस : फ्रॉम रिसर्च राइटिंग टू एकेडमिक पब्लिशिंग एंड थीसिस प्रिपरेशन’ कार्यशाला में शिक्षकों, शोधार्थियों व विद्यार्थियों को शोध कार्य को बेहतर तरीके से लिखने, प्रस्तुत करने और प्रकाशित कराने की प्रक्रिया समझाई जा रही है। 18 सितंबर तक आयोजित कार्यशाला में 143 प्रतिभागी पंजीकृत हैं। इनमें 32 शिक्षक और 105 शोधार्थी हैं। अन्य संस्थानों के प्रतिभागी भी शामिल हैं।
अब तक के सत्रों में रिसर्च राइटिंग, थीसिस तैयार करने, संदर्भ प्रबंधन और शोध प्रस्तुतीकरण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया है। शोध दस्तावेज को व्यवस्थित और पेशेवर तरीके से तैयार करने के लिए लेटेक्स और प्रस्तुतीकरण के लिए बीमर जैसे टूल की जानकारी दी गई। शोध पत्र तैयार करने से लेकर उपयुक्त जर्नल के चयन, पीयर रिव्यू और प्रकाशन प्रक्रिया को भी कार्यशाला का हिस्सा बनाया गया है।
कार्यशाला में शोध की गुणवत्ता के साथ मौलिकता, शोध नैतिकता और सामाजिक उपयोगिता पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रकाशन नैतिकता के साथ पेटेंट लेखन और बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। साहित्य समीक्षा, शोधकर्ता प्रोफाइल और शोध को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने के आधुनिक तरीकों पर भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। कार्यशला का आयोजन विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार के मार्गदर्शन में हो रहा है। समन्वय डॉ. विपुल नारायण, डॉ. अमित कुमार द्विवेदी और डॉ. स्वप्निता श्रीवास्तव कर रहे हैं।
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अब तक के सत्रों में रिसर्च राइटिंग, थीसिस तैयार करने, संदर्भ प्रबंधन और शोध प्रस्तुतीकरण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया है। शोध दस्तावेज को व्यवस्थित और पेशेवर तरीके से तैयार करने के लिए लेटेक्स और प्रस्तुतीकरण के लिए बीमर जैसे टूल की जानकारी दी गई। शोध पत्र तैयार करने से लेकर उपयुक्त जर्नल के चयन, पीयर रिव्यू और प्रकाशन प्रक्रिया को भी कार्यशाला का हिस्सा बनाया गया है।
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कार्यशाला में शोध की गुणवत्ता के साथ मौलिकता, शोध नैतिकता और सामाजिक उपयोगिता पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रकाशन नैतिकता के साथ पेटेंट लेखन और बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। साहित्य समीक्षा, शोधकर्ता प्रोफाइल और शोध को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने के आधुनिक तरीकों पर भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। कार्यशला का आयोजन विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार के मार्गदर्शन में हो रहा है। समन्वय डॉ. विपुल नारायण, डॉ. अमित कुमार द्विवेदी और डॉ. स्वप्निता श्रीवास्तव कर रहे हैं।
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