मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतरने पर कांग्रेस पार्टी का गणित गड़बड़ा गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव राजेश तिवारी द्वारा मैराथन बैठक में पार्टी प्रत्याशी का नाम तय होने के बावजूद अब बदली परिस्थितियों में नए सिरे से मंथन किया जाने लगा है।
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इसी बीच भाजपा ने सदर विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रत्याशी बनाने की घोषणा कर दी। इसकी वजह से कांग्रेस पार्टी के सारे समीकरण ध्वस्त हो गए। अब पार्टी प्रत्याशी को लेकर नए सिरे से मंथन करने को मजबूर हो गई है। सोमवार को गोरखपुर मंडल के पार्टी प्रत्याशियों के अलावा पदाधिकारियों के साथ राष्ट्रीय सचिव ने बैठक की। इसके बाद वे बस्ती मंडल के दावेदारों और पदाधिकारियों के साथ बैठक करने के लिए निकल गए।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष आशुतोष तिवारी ने कहा कि बदली परिस्थितियों में गोरखपुर मंडल के दावेदारों और पदाधिकारियों के साथ राष्ट्रीय सचिव ने सोमवार को भी बैठक की। इसके बाद बस्ती मंडल के विभिन्न विधानसभा क्षेत्र के दावेदारों और पदाधिकारियों के साथ बैठक के लिए राष्ट्रीय सचिव बस्ती चले गए। पूरी उम्मीद है कि अगले तीन से चार दिनों में गोरखपुर मंडल के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों के नाम की घोषणा हो जाएगी।
बदल गया समीकरण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के एलान के बाद, राजनीतिक दलों का समीकरण बदल गया। बसपा में पहले से दावेदारी करने वाले नेताओं ने कदम पीछे खींच लिए हैं। कुछ से पदाधिकारियों ने संपर्क किया तो उन्होंने योगी के सामने लड़ने से खुद ही मना कर दिया। अब ऐसे में नए सिरे से मजबूत प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी गई है।
बसपा में शहर विधानसभा क्षेत्र से दो-तीन नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश की थी। संजीव सिंह श्रीनेत ने तो बैनर-पोस्टर भी लगा दिए थे, लेकिन भाजपा ने जबसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रत्याशी बनाया है, सारे समीकरण बदल गए हैं। दावेदारी पेश करने वाले नेता अब साइलेंट मोड में आ गए हैं। वहीं, पार्टी के पदाधिकारी भी ऐसे प्रत्याशी की खोज में हैं, जो मजबूती से चुनाव लड़ सके। हालांकि, अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है।
अंदरखाने की खबर है कि दो-तीन नेताओं से पदाधिकारियों ने संपर्क साधा है, लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने में रुचि नहीं दिखाई है। पार्टी वॉक ओवर देने के मूड में नहीं है। संगठन के एक पदाधिकारी ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। चर्चा यह भी है कि शहर से प्रत्याशी नहीं मिलने पर, दूसरे जिले से किसी बड़े नेता को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। महानगर अध्यक्ष आलोक मोदी का कहना है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ पार्टी मजबूती के साथ लड़ेगी। प्रत्याशी के चयन की प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही मजबूत प्रत्याशी का चयन कर लिया जाएगा।