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Nirjala Ekadashi 2021: 26 एकादशियों का फल देती है निर्जला एकादशी, जानिए किस विधि से पूजा करने पर खुश होंगे भगवान

Mon, 21 Jun 2021 09:45 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 21 Jun 2021 09:45 AM IST
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Nirjala Ekadashi Vrat 2021 Religious Importance Of Nirjala Ekadashi Puja Vidhi
निर्जला एकादशी 2021। - फोटो : अमर उजाला।
भगवान विष्णु की उपासना का पर्व निर्जला एकादशी सोमवार यानी आज मनाया जा रहा है। वर्ष में 24 एकादशी होते हैं, लेकिन जिस वर्ष अधिकमास होता है, उस वर्ष में 26 एकादशी होते हैं। इन सभी में निर्जला एकादशी को श्रेष्ठ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत रखने से श्रद्धालुओं को वर्ष के सभी एकादशियों का फल मिल जाता है। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। महर्षि वेदव्यास के अनुसार, भीमसेन ने इसे धारण किया था। इस व्रत में सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक जल भी न पीने का विधान होने के कारण इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। इस व्रत को विधि-विधान से करने वालों को दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है। वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय पांच बजकर 13 मिनट और एकादशी तिथि का मान सुबह नौ बजकर 43 मिनट पश्चात द्वादशी है। स्वाती नक्षत्र दिन में एक बजकर 55 मिनट तक, शिव योग और छत्र नामक महाऔदायिक योग भी है।
Nirjala Ekadashi Vrat 2021 Religious Importance Of Nirjala Ekadashi Puja Vidhi
निर्जला एकादशी 2021। - फोटो : अमर उजाला।
निर्जला एकादशी पर दान का महत्व
पंडित राकेश पांडेय ने बताया कि व्रतियों को यथाशक्ति अन्न, जल, वस्त्र, आसन, जूता, छतरी, पंखी तथा फल आदि का दान करना चाहिए। जल कलश का दान करने वाले श्रद्धालुओं को वर्ष भर की एकादशियों का फल प्राप्त होता है। इस व्रत से अन्य एकादशियों पर अन्न खाने का दोष छूट जाता है तथा संपूर्ण एकादशियों के पुण्य का लाभ भी मिलता है। श्रद्धापूर्वक जो इस पवित्र एकादशी का व्रत करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर अविनाशी पद प्राप्त करता है।
Nirjala Ekadashi Vrat 2021 Religious Importance Of Nirjala Ekadashi Puja Vidhi
निर्जला एकादशी 2021। - फोटो : अमर उजाला।
निर्जला एकादशी पूजन विधि
पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र ने बताया कि इस दिन ब्रह्ममुहुर्त में दैनिक कर्मों से निवृत होकर स्नान कर पवित्र हों। स्वच्छ वस्त्र धारणकर भगवान विष्णु की पूजा आराधना व आरती भक्ति भाव से विधि-पूर्वक संपन्न करें। महिलाएं पूर्ण श्रृंगार कर मेहंदी आदि रचाकर पूर्ण श्रद्धा, भक्तिभाव से पूजन करने के पश्चात कलश के जल से पीपल के वृक्ष को अर्घ्य दें। 
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Nirjala Ekadashi Vrat 2021 Religious Importance Of Nirjala Ekadashi Puja Vidhi
निर्जला एकादशी 2021। - फोटो : अमर उजाला।
दूसरे दिन सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर प्रार्थना करें। इसके बाद यथा शक्ति ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा में शीतल जल से भरा घड़ा, अन्न, वस्त्र, छाता, पान, शैय्या, आसन, पंखा, सुवर्ण और गौ-का दान करें।
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Nirjala Ekadashi Vrat 2021 Religious Importance Of Nirjala Ekadashi Puja Vidhi
निर्जला एकादशी 2021। - फोटो : अमर उजाला।
निर्जला एकादशी कथा
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि महाभारत काल में पांडु पुत्र भीम को महर्षि वेद व्यास ने निर्जला एकादशी व्रत रखने को कहा। महर्षि ने कहा कि इस दिन अन्न और जल दोनों का त्याग करना पड़ता है। जो भी मनुष्य एकादशी तिथि के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक बिना पानी पीए रहता है और सच्ची श्रद्धा से निर्जला व्रत का पालन करता है, उसे साल में जितनी एकादशी आती हैं, उन सबका फल मिल जाता है। इसके बाद भीमसेन निर्जला एकादशी व्रत का पालन करने लगे और पाप मुक्त हो गए।
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