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डेढ़ सौ साल पहले भी संकट में रेलवे ही बना था तारणहार, ऐसे की गई थी हजारों लोगों की मदद

Thu, 21 May 2020 07:43 AM IST
vivek shukla राजन राय गोरखपुर।
राजन राय गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 21 May 2020 07:43 AM IST
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NER first train started with disaster relief in 1875 Famine
गोरखपुर रेलवे स्टेशन। - फोटो : अमर उजाला

तकरीबन 145 वर्ष पूर्व दरभंगा और आसपास के इलाकों (उत्तर बिहार) में जबरदस्त अकाल पड़ा था। लोगों के लिए भोजन और पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया। मौतें होने लगीं। माल लेकर वहां तक जाने का कोई रास्ता नहीं था। आपदा राहत सामग्री पहुंचाने के लिए अंग्रेज अफसरों ने दलसिंह सराय-समस्तीपुर-दरभंगा रेल लाइन बिछाई और एक नवंबर 1875 में पूर्वोत्तर रेले (एनईआर) की पहली ट्रेन (माल) चलाई गई। जो अनाज और पशुओं का चारा लेकर गई।


 

NER first train started with disaster relief in 1875 Famine
पहले ऐसा दिखता था गोरखपुर रेलवे स्टेशन। - फोटो : अमर उजाला

आज भी कोरोना संकट में ट्रेनें और मालगाड़ियां पूरे देश में लाइफलाइन बनी हुई हैं। देश में पहले कंपनी रेलवे हुआ करती थीं। दलसिंह सराय स्टेशन उस वक्त तिरहुत रेलवे के अधीन था, जो बाद में 14 अप्रैल 1952 में जोन के गठन के वक्त यह रेल लाइन पूर्वोत्तर रेलवे का हिस्सा बन गया।

NER first train started with disaster relief in 1875 Famine
ऐसे बिछाई गई थीं पटरियां। - फोटो : अमर उजाला।

रेलवे के दस्तावेजों में रेल लाइन बिछाने और ट्रेन चलाए जाने के साक्ष्य मौजूद हैं। रेलवे के जानकारों के मुताबिक उस समय पहले बाढ़ और फिर जबरदस्त सूखा पड़ गया था। रास्ते कट गए थे। नदियों ने अपना रास्ता बदल दिया था। अकाल के चलते राशन की कमी हो गई।

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NER first train started with disaster relief in 1875 Famine
NER - फोटो : अमर उजाला।

पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया। काफी संख्या में भूख से मौतें होने लगीं। दस्तावेजों में हजारों मौतों का जिक्र है। आपदा राहत सामग्री पहुंचाने के सारे रास्ते बंद होते देख अंग्रेज अफसरों ने रेल लाइन बिछाने का निर्णय लिया। इसी रेल लाइन से आपदा सामग्री भेजी जाने लगी। बाद में यह माल ढुलाई का और फिर यात्रियों के लिए परिवहन का जरिया बनी। कोरोना संकट में भी माल की ढुलाई और अप्रवासी श्रमिकों को घर पहुंचाने में रेलवे बड़ा जरिया बना है।

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NER first train started with disaster relief in 1875 Famine
NER - फोटो : अमर उजाला

इसी के साथ उत्तरी बिहार में बिछने लगी थीं रेल लाइनें
दलसिंह सराय से दरभंगा लाइन बिछने के बाद ही उत्तरी बिहार में रेल लाइनों का जाल बिछने लगा। आपदा ही सही यह वक्त बिहार को रेलवे से जोड़ने की शुरूआत थी। 1877 में समस्तीपुर से मुजफ्फरपुर, 1883 में मुजफ्फरपुर से मोतिहारी और मोतिहारी से बेतिया लाइन बिछी।

छह महीने में बिछी थी 43 मील लंबी रेल लाइन
दलसिंह सराय-समस्तीपुर-दरभंगा नई रेल लाइन की लंबाई 43 मील थी। इसे बिछाने में छह माह का समय लग गया था। अंग्रेज अफसरों ने दूसरे राज्यों से भी मजदूर बुलाकर इस काम में लगाए थे।

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