उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के 'युवा वैज्ञानिक' राहुल सिंह ने ऐसा ड्रोन तैयार किया है जो सरहद पर सैनिकों की मदद करेगा, वहीं किसानों के लिए भी मददगार साबित होगा। सेना ड्रोन का इस्तेमाल नदी की गहराई मापने में कर सकती है, वहीं किसान खाद व कीटनाशक का छिड़काव भी सरलता से कर सकेंगे।
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राहुल सिंह (मध्य में)।
- फोटो : अमर उजाला।
राहुल की खोज को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमटीयू) के डिजाइन एंड इक्यूबेशन सेंटर से मंजूरी मिल चुकी है। अमर उजाला संवाददाता से राहुल ने ड्रोन की खासियतें बताईं।
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राहुल सिंह।(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
राहुल ने कहा कि वे मूलत: महाराजगंज के बीजापार, आसमन छपरा के रहने वाले हैं। उनके पिता संजय सिंह किसान और मां रासमुनी देवी गृहिणी हैं। खेती में पिता को हो रही परेशानियों के मद्देनजर राहुल ने कई उपयोगी औजार बनाए।
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राहुल सिंह (मध्य में)।
- फोटो : अमर उजाला।
ड्रोन फोटो सेंसर की मदद से बाढ़ आने पर फंसे लोगों की लोकेशन पता कर उनकी फोटो सेना के जवानों को भेजने की उच्चीकृत क्षमता से भी लैस है। 'युवा वैज्ञानिक' का दावा है कि यह अब तक का सबसे सस्ता ड्रोन है। इसलिए इसका नाम 'लो कॉस्ट ऑफ ड्रोन' रखा है। इसे तैयार करने में 80 हजार रुपये का खर्च आया है।
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राहुल सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
आवाज से भी होगा नियंत्रित
एबीसी पब्लिक स्कूल में बारहवीं के छात्र राहुल ने बताया कि उन्होंने ड्रोन थल सैनिकों और किसानों को ध्यान में रखकर बनाया है। ड्रोन की खासियत यह है कि रिमोट के अलावा यह वॉइस कैच (आवाज) पर नियंत्रित किया जा सकता है। किसान हिंदी, अंग्रेजी और भोजपुरी भाषा में बोलकर ड्रोन को कंट्रोल कर सकते हैं।