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गोरखपुर के इस मंदिर का इतिहास 400 साल पुराना, मुक्तिधाम से है खास नाता

Tue, 18 Feb 2020 01:59 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: vivek shukla Updated Tue, 18 Feb 2020 01:59 PM IST
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Mukteshwar Nath temple got its name from Muktidham in gorakhpur
मुक्तेश्वरनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
शहर में राप्ती नदी के तट पर स्थित मुक्तेश्वरनाथ मंदिर शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर का मुक्तेश्वर नाम इसके बगल में मुक्तिधाम होने के कारण पड़ा। शिवरात्रि में यहां शिव भक्तों का जन सैलाब उमड़ता है। शिवरात्रि पर भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
Mukteshwar Nath temple got its name from Muktidham in gorakhpur
मुक्तेश्वरनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
ऐसी मान्यता है कि चार सौ वर्ष पूर्व यहां घना जंगल हुआ करता था। एक बार बांसी स्टेट के राजा यहां शिकार करने आए और जंगल में शेरों ने उन्हें घेर लिया। जान संकट में फंसी देखकर राजा ने अपने इष्टदेव भगवान शिवशंकर को याद किया। चमत्कार हुआ और शेर वापस लौट गए। इसी स्थान पर राजा ने भगवान का मंदिर बनवाने का संकल्प लिया। उनके आदेश पर महाराष्ट्र निवासी बाबा काशीनाथ ने यहां मंदिर की स्थापना कराई। काशीनाथ ने नौसड़ के बगल में स्थित पेवनपुर निवासी यदुनाथ उपाध्याय को मंदिर का कार्यभार सौंप तीर्थाटन पर चले गए। तब से उन्हीं के परिवार के लोग मंदिर की देखरेख कर रहे हैं।

पुजारी यदुनाथ के बाद स्व. शिवपूजन और वर्तमान में मुख्य पुजारी झिनकू उपाध्याय मंदिर की देखभाल कर रहे हैं। मुख्य पुजारी के पुत्र रमानाथ उपाध्याय देखभाल में सहयोग करते हैं।
Mukteshwar Nath temple got its name from Muktidham in gorakhpur
निर्माणाधीन। - फोटो : अमर उजाला
चल रहा सुंदरीकरण कार्य
इस मंदिर को लेकर लोगों की आस्था को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए दो करोड़ 19 लाख रुपये का बजट जारी किया है। बजट मिलने के बाद यहां तेजी से सुंदरीकरण कार्य हो रहा है। 
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मुक्तेश्वरनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी झिनकू उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला
शिवरात्रि के दिन होता है रात्रि जागरण
मुख्य पुजारी झिनकू उपाध्याय ने बताया- आम दिनों में मंदिर में प्रतिदिन सुबह सात बजे और शाम को आठ बजे आरती होती है। शिवरात्रि के दिन यहां रात्रि जागरण होता है। रात में नौ बजे, 12 बजे, भोर में तीन बजे और सुबह छह बजे आरती होती है। लोग बाबा के पूजन अर्चन और जलाभिषेक के बाद यहां लगे मेले का लुत्फ उठाते हैं।
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मुक्तेश्वरनाथ मंदिर के पुजारी रमानाथ उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला
मंदिर में होते हैं विभिन्न अनुष्ठान
पुजारी रमानाथ उपाध्याय  ने बताया- संतान प्राप्ति एवं आरोग्यता के लिए साधक यहां आकर अनुष्ठान आदि कराते हैं। पहले केवल भगवान शिव का मंदिर था, बाद में हुए नवनिर्माण के बाद यहां शिव परिवार, मां दुर्गा, हनुमान जी की भी प्रतिमाएं स्थापित की गईं। आज भी यहां प्राचीन कुआं और पीपल वृक्ष शिवभक्तों के श्रद्धा का केंद्र है।
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