गोरखपुर जनपद में फोरलेन और एक्सप्रेसवे बनाने के लिए ग्रामीण सड़कों से डंपर से खूब मिट्टी-गिट्टी ढोई गई। ओवरलोड भारी वाहन दौड़ाने से 20 से अधिक ग्रामीण सड़कें ध्वस्त हो गईं। अब इन पर चलना ग्रामीणों के लिए मुश्किल हो रहा है। करीब एक साल होने जा रहा है सड़कों को बदहाल हुए, लेकिन वादे के बावजूद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) इन्हें दुरुस्त नहीं करा रहे हैं।
गोरखपुर: ओवरलोड डंपर दौड़ाकर बिगाड़ दी ग्रामीण सड़कों की सूरत, आना-जाना हो गया मुश्किल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दरअसल, गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों से डंपर से मिट्टी व गिट्टी ढोई गई। वहीं, बेलघाट से नौसड़ तक हो रहे एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए भी डंपर से मिट्टी-गिट्टी व बालू ढोई गई है। जानकार बताते हैं कि जिन डंपरों से मिट्टी जा रही थी उस पर 40 से 50 टन वजन होता था। जबकि ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों की क्षमता 10 से 12 टन का वजन बर्दास्त करने की होती है। इस तरह लगातार ओवरलोड डंपर चलने से ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें ध्वस्त हो गई हैं।
गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन के निर्माण की जिम्मेदारी एनएचएआई के जिम्मे है और एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी यूपीडा के पास है। इन्हीं संस्थाओं पर ग्रामीण सड़कों को खराब करने का आरोप है। इसलिए इन्हीं को इनकी मरम्मत करानी है, लेकिन ये इस तरफ ध्यान नहीं दे रही हैं। संवाद
फोरलेन बनाने में ये सड़कें टूटीं
रकहट-गोबरहियां मार्ग यातायात के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। रकहट में राप्ती नदी पर पुल बना है। यह देवरिया और गोरखपुर की सरहद को जोड़ता है। इस नाते यहां से काफी संख्या में लोग गोरखपुर-वाराणसी जाने के लिए गोबरहियां पहुंचते हैं। करीब एक साल पहले इस पर दिन रात चले डंपर की वजह से सड़क ध्वस्त हो गई है। पिछले साल जब अमर उजाला ने मामले को उठाया तो लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता ने कहा था कि जो भी सड़क डंपर चलने से टूटी हैं, उन्हें एनएचएआई बनवाएगा। मगर ऐसा हुआ नहीं।
इसी तरह हाटा-असवनपार तथा असवनपार से रकहट मार्ग डंपर चलने से ध्वस्त हो गया है। इस रास्ते घेवरपार तथा सहुआकोल के पास से मिट्टी लादकर डंपर फोरलेन पर गिराने जाता था। इसी तरह कौड़ीराम ब्लॉक में स्थित गंभीरपुर-भलुआन मार्ग डंपर चलने से ध्वस्त हो गया है। वहीं, गंभीरपुर-गगहा मार्ग डंपर चलने से कई स्थानों पर खराब हो गया है।
एक्सप्रेसवे के कारण ये मार्ग हुए ध्वस्त
पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण अंबेडकरनगर से होकर कम्हरियाघाट होते हुए नौसड़ तक हो रहा है। इसका निर्माण यूपीडा की तरफ से कराया जा रहा है। एक्सप्रेसवे पर मिट्टी व गिट्टी ढोने के लिए डंपर लगाया गया था। जिन रास्तों से डंपर गुजरे वे पूरी तरह से खराब हो गए हैं। पिपरी रोहारी मार्ग पर कहीं गिट्टी तक नहीं दिख रही है। इसी ब्लॉक में पड़ने वाला टिकुलीडाड़-महुलिया मार्ग ध्वस्त हो गया है। बेलघाट-हनुमान मंदिर मार्ग भी टूट गया है।
टूटी सड़कों से ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल
बेलघाट ब्लॉक के टिकुलीडाड गांव के प्रधान धर्मेंद्र यादव का कहना है कि एक्सप्रेसवे बन रहा है यह तो ठीक है, लेकिन इसकी वजह से जो ग्रामीण सड़कें टूटी हैं उससे लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को इन्हीं रास्तों से रोज आना-जाना होता है। इनके खराब होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। बेलघाट ब्लॉक निवासी समाज सेवी राम ललित यादव का कहना है कि लिंक एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए डंपर से मिट्टी ढोने के दौरान बहुत से मार्ग गड्ढों में तब्दील हो गए हैं। एक साल से ऐसे रास्तों से गुजरना मुश्किल हो गया है।
सैकड़ों गांवों की लाइफ लाइन पूरी तरह ध्वस्त
रकहट गांव निवासी हनुमान पांडे का कहना है कि रकहट-गोबरहियां मार्ग देवरिया जिले और गोरखपुर जनपद के कछार क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों की लाइफ लाइन जैसा है। इसी रास्ते देवरिया जिले के लोग गोरखपुर, बनारस, आजमगढ़ और मऊ तक आते-जाते हैं। एक साल पहले फोरलेन पर मिट्टी डालने के लिए चले डंपर ने सड़क को ध्वस्त कर दिया। विधानसभा चुनाव के दौरान सड़क के केवल गड्ढे भरे गए थे। सरकार से मांग है कि इसे जल्द ठीक किया जाए।
अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड प्रवीण कुमार ने कहा कि एनएचएआई ने फोरलन और यूपीडा ने लिंक एक्सप्रेसवे पर मिट्टी डालने के लिए खूब डंपर चलवाए हैं। इससे लोक निर्माण विभाग की 20 से अधिक ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें टूट गई हैं। इन्हें ठीक कराने की जिम्मेदारी इन्हीं संस्थाओं की है। लोक निर्माण विभाग ने शासन से लेकर संबंधित संस्थाओं के आला अधिकारियों तक को पत्र लिखा था। तब आश्वासन दिया गया था कि टूटी सड़कों को ठीक करा दिया जाएगा, मगर ऐसा नहीं किया गया। अब इसकी शिकायत शासन से की जाएगी।