गोरखपुर में हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाली आयुषी दुबे बहुत ही होनहार लड़की थी। वह नोएडा में रहकर मेडिकल फॉरेंसिक की कोर्स कर रही थी। माता-पिता के लिए वह बेटे से भी बढ़कर थी। उसके अच्छे व्यवहार से परिवार सहित पड़ोस के लोग भी कायल थे। बृहस्पतिवार का दिन परिवार के लिए काला दिन साबित हुआ। हंसते-खेलते परिवार पर पता नहीं किसकी नजर लग गई। पलभर में ही परिवार की खुशियां गम में बदल गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
माता-पिता के लिए बेटे से भी बढ़कर थी आयुषी, सड़क हादसे में दोस्त के साथ हो गई थी मौत
खुखुंदू निवासी सन्निवेश दुबे का स्थानीय चौराहे पर थोक व टेंट हाउस का लंबा कारोबार है। उनकी केवल तीन बेटियां ही हैं। आयुषी उर्फ सुलेखा दुबे दूसरे नंबर की थी। बड़ी बेटी अनन्या दुबे लखनऊ में रहकर बैंकिंग लाइन से तैयारी कर रही हैं तो दूसरी नंबर बेटी आयुषी दुबे नोएडा के गलगोटिया विश्वविद्यालय में मेडिकल फॉरेंसिक में पढ़ाई कर रही थी। जबकि सबसे छोटी बेटी शिवांगी दुबे गोरखपुर में रहकर इंटर मीडिएट में पढ़ती है।
लॉकडाउन के दौरान वह देवरिया आईटीआई स्थित अपने घर आ गई थी। माता-पिता और बहनों के साथ पूरा परिवार लॉकडाउन भर एकसाथ रहा। तकरीबन एक सप्ताह पहले आयुषी फिरसे अपना लैपटॉप सहित कुछ आवश्यक सामान लेने के लिए नोएडा गई थी। बृहस्पतिवार को लौटते समय हादसे का शिकार हो गई। घटना की खबर मिलते ही हर कोई आवाक रह गया, वहीं मां गीता देवी, पिता सन्निवेश और दोनों बहनें बदहवास हैं।
पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचते ही मचा कोहराम
घटना के बाद शव मर्चरी में रख दिया गया, जिससे परिजन देख नहीं पाए। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही शव गांव पहुंचा। परिवार में कोहराम मच गया। चीख पुकार सुनकर सबकी आंखें नम हो गई। मौके पर जुटे लोग परिवार का ढ़ाढ़स बढ़ा रहे थे।
लोगों के मददगार रुप में प्रसिद्ध हैं सन्निवेश
धार्मिक अनुष्ठानों व गरीब परिवार के सहयोग के लिए हर संभव मदद करने को लेकर इलाके में सन्निवेश दुबे प्रसिद्ध हैं। इलाके में कहीं भी धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन होता है तो उसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हुए हरसंभव सहयोग के लिए खड़े रहते हैं। बेटी की सड़क हादसे में मौत के बाद हर किसी की जुबान से सिर्फ यही निकल रहा है कि इतने अच्छे इंसान के साथ ऐसा कैसे हो गया।