{"_id":"5e91849d8ebc3e76a20925a5","slug":"many-people-responsible-after-lockdown-in-gorakhpur","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"इन लोगों के लिए यादगार बना 'लॉकडाउन', वजह जानकर खुश हो जाएंगे आप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इन लोगों के लिए यादगार बना 'लॉकडाउन', वजह जानकर खुश हो जाएंगे आप
Sun, 12 Apr 2020 10:41 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 12 Apr 2020 10:41 AM IST
विज्ञापन
gorakhpur news
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना की चुनौतियों के बीच हुए लॉकडाउन ने लोगों को जिम्मेदार भी बना दिया है। हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने या फिर जॉब के दौरान अकेले रहने वाले अब खाना बनाना सीख गए हैं तो घर के बच्चों में कपड़ा धुलने, अपना बिस्तर ठीक करने और घर की सफाई की आदत आ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि 21 दिनों में काम करने की जो भी आदत पड़ेगी, वह जल्दी नहीं छूटेगी। जिम्मेदारियों का यह भाव भी नहीं खत्म होगा।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरहीता करीम।
- फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर बेटे ने सीख लिया खाना बनाना
शहर की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरहीता करीम का बेटा जीशान करीम गुजरात में डॉक्टर है। जब से लॉकडाउन हुआ, तब से घर का काम करने वाली महिला को छुट्टी दे दी है। अब समस्या खाना बनाने, घर साफ रखने और कपड़ा प्रेस करके अस्पताल जाने की आ गई।
लिहाजा, बेटे ने सब कुछ सीखने में ही भलाई समझी। मां की शरण में आए और व्हाट्सएप वीडियो कॉलिंग से सीखने का सिलसिला शुरू किया। डॉ. सुरहीता करीम के मुताबिक, इतने दिन के लॉकडाउन में ही बेटा खाना बनाना सीख गया है। टीशर्ट प्रेस करके बताया तो वह भी अपना कपड़ा फोल्ड करके प्रेस करने लगा। घर साफ रखने की आदत भी पड़ गई है।
शहर की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरहीता करीम का बेटा जीशान करीम गुजरात में डॉक्टर है। जब से लॉकडाउन हुआ, तब से घर का काम करने वाली महिला को छुट्टी दे दी है। अब समस्या खाना बनाने, घर साफ रखने और कपड़ा प्रेस करके अस्पताल जाने की आ गई।
लिहाजा, बेटे ने सब कुछ सीखने में ही भलाई समझी। मां की शरण में आए और व्हाट्सएप वीडियो कॉलिंग से सीखने का सिलसिला शुरू किया। डॉ. सुरहीता करीम के मुताबिक, इतने दिन के लॉकडाउन में ही बेटा खाना बनाना सीख गया है। टीशर्ट प्रेस करके बताया तो वह भी अपना कपड़ा फोल्ड करके प्रेस करने लगा। घर साफ रखने की आदत भी पड़ गई है।
परिवार के साथ बागवानी का काम करते डॉ. मुदित गुप्ता।
- फोटो : अमर उजाला
माइक्रोनी बनाना और बागवानी करना सीखा
दंत चिकित्सक डॉ. मुदित गुप्ता को बागवानी का शौक था लेकिन व्यस्तता की वजह से समय नहीं मिल पा रहा था। लॉकडाउन हुआ तो क्लीनिक बंद हो गई। अब समय ही समय है। इसका फायदा डॉ. मुदित ने उठाया और मां कमलेश गुप्ता से बागवानी सीख ली। जिस किचेन में जाने का ज्यादा समय नहीं मिलता था, उसमें भी हाथ आजमा लेते हैं। बच्चों के कहने पर माइक्रोनी सहित कई फास्ट फूड बनाना सीख लिया है।
दंत चिकित्सक डॉ. मुदित गुप्ता को बागवानी का शौक था लेकिन व्यस्तता की वजह से समय नहीं मिल पा रहा था। लॉकडाउन हुआ तो क्लीनिक बंद हो गई। अब समय ही समय है। इसका फायदा डॉ. मुदित ने उठाया और मां कमलेश गुप्ता से बागवानी सीख ली। जिस किचेन में जाने का ज्यादा समय नहीं मिलता था, उसमें भी हाथ आजमा लेते हैं। बच्चों के कहने पर माइक्रोनी सहित कई फास्ट फूड बनाना सीख लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बच्चों के साथ कैरम खेलते शिक्षक आशुतोष सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
पत्नी मायके जाएगी तो भी दिक्कत नहीं आएगी
प्राथमिक विद्यालय आराजी बसडीला पिपराइच में शिक्षक आशुतोष सिंह अब पूरा खाना बनाना सीख गए हैं। पहले दाल और चावल बनाते थे। अब सब्जी, रोटी भी बना रहे हैं। घर की साफ-सफाई में भी पत्नी का हाथ बंटाते हैं। आशुतोष के मुताबिक एक तरह से देखा जाए तो लॉकडाउन ने जिम्मेदार बना दिया है।
उनका कहना है, मान लीजिए पत्नी कभी मायके चली गई तो दिक्कत नहीं आएगी। खाना बनाना आ गया है। 21 दिन घर में रहकर समय काटना मुश्किल था तो सोचा घरेलू जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाए।
प्राथमिक विद्यालय आराजी बसडीला पिपराइच में शिक्षक आशुतोष सिंह अब पूरा खाना बनाना सीख गए हैं। पहले दाल और चावल बनाते थे। अब सब्जी, रोटी भी बना रहे हैं। घर की साफ-सफाई में भी पत्नी का हाथ बंटाते हैं। आशुतोष के मुताबिक एक तरह से देखा जाए तो लॉकडाउन ने जिम्मेदार बना दिया है।
उनका कहना है, मान लीजिए पत्नी कभी मायके चली गई तो दिक्कत नहीं आएगी। खाना बनाना आ गया है। 21 दिन घर में रहकर समय काटना मुश्किल था तो सोचा घरेलू जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाए।
विज्ञापन
किचेन में पत्नी और बेटी के साथ निर्भय नारायण सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
घरेलू जिम्मेदारियों का निर्वहन कठिन
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कर्मचारी निर्भय नारायण सिंह की पत्नी शिक्षक हैं। वह जल्दी घर आ जाती हैं लेकिन निर्भय देर शाम तक लौट पाते हैं। घर-परिवार की सारी जिम्मेदारी पत्नी को उठानी पड़ती है। लॉकडाउन में समय मिला तो निर्भय ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना शुरू किया। घरेलू कामकाज में भी हाथ आजमाया। पूरा दिन बच्चों के साथ गुजरता है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कर्मचारी निर्भय नारायण सिंह की पत्नी शिक्षक हैं। वह जल्दी घर आ जाती हैं लेकिन निर्भय देर शाम तक लौट पाते हैं। घर-परिवार की सारी जिम्मेदारी पत्नी को उठानी पड़ती है। लॉकडाउन में समय मिला तो निर्भय ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना शुरू किया। घरेलू कामकाज में भी हाथ आजमाया। पूरा दिन बच्चों के साथ गुजरता है।