कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में मरीज लंग्स फाइब्रोसिस के शिकार हुए हैं। लंग्स फाइब्रोसिस के कई मरीज मौत के मुंह में चले गए, कई अब भी इलाज के लिए बेहाल हैं। मुश्किल यह है कि लंग्स फाइब्रोसिस का इलाज बेहद महंगा है। इकमो मशीन से इसके इलाज पर प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है और अगर अंतिम विकल्प फेफड़े के प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ी तो डेढ़ करोड़ रुपये का भारी भरकम खर्च होना तय है।
Exclusive: कोरोना की दूसरी लहर में मरीज हुए लंग्स फाइब्रोसिस का शिकार, लखनऊ किए जा रहे रेफर
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डॉक्टर की भी लंग्स फाइब्रोसिस से गई थी जान
शहर के रहने वाले 44 साल के एक डॉक्टर कोरोना संक्रमित हुए। परिजन इलाज के लिए दिल्ली के एक बड़े हॉस्पिटल में ले गए। जांच के दौरान पता चला कि उनका फेफड़ा 80 प्रतिशत से अधिक खराब हो चुका है। ऐसे में फेफड़ा बदलना पड़ेगा। इसके लिए परिजन किसी तरह तैयार हुए, लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई। बताया जाता है कि वह भी कई दिनों तक इकमो मशीन के सपोर्ट पर थे।
फेफड़ों के प्रत्यारोपण से पहले ही हो गई मौत
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफसर डॉ मानवेंद्र प्रताप सिंह कोरोना से संक्रमित हुए थे। कुछ ही दिनों में उनका फेफड़ा 80 प्रतिशत से अधिक खराब हो गया। लखनऊ में कुछ दिनों तक वह इकमो मशीन पर रहे। इस बीच हैदराबाद में फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए बात चली। एयर एंबुलेंस तक की व्यवस्था हो गई थी, लेकिन मशीन का सपोर्ट हटाने के बाद कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई।
डेढ़ करोड़ से ज्यादा है फेफड़े के प्रत्यारोपण का खर्च
डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि फेफड़े के प्रत्यारोपण का खर्च काफी महंगा है। एक प्रत्यारोपण में डेढ़ करोड़ से ज्यादा का खर्च आता है। देश में हैदराबाद के अलावा पीएमएस वेल्लोर में फेफड़े का प्रत्यारोपण होता है। इसके अलावा इकमो मशीन की सुविधा भी पीजीआई में है। ऐसे मरीजों को हर हाल में इकमो मशीन पर रखना पड़ता है।
काफी महंगा है इकमो मशीन से इलाज
आईएमए के सचिव व चेस्ट फिजिशियन डॉ वीएन अग्रवाल ने बताया कि दूसरी लहर में लंग्स फाइब्रोसिस की चपेट में आने से कई मरीजों की मौत हुई है। कई मरीजों को लखनऊ रेफर किया गया है, जिनका इलाज इकमो मशीन के जरिए हुआ है। यह मशीन मरीज का खून बाहर निकालकर यंत्र के माध्यम से ऑक्सीजेनेशन कर वह खून फिर से शरीर के अंदर पहुंचा देती है। यह एक कृत्रिम प्रक्रिया है। इसमें शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल जाती है। इस मशीन से इलाज के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये प्रतिदिन खर्च करना पड़ता है।