फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Exclusive: कोरोना की दूसरी लहर में मरीज हुए लंग्स फाइब्रोसिस का शिकार, लखनऊ किए जा रहे रेफर

Wed, 14 Jul 2021 05:04 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्रा, गोरखपुर।
नीरज मिश्रा, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 14 Jul 2021 05:04 PM IST
विज्ञापन
many patients became victims of lung fibrosis in second wave of corona
कोरोना वायरस। - फोटो : अमर उजाला

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में मरीज लंग्स फाइब्रोसिस के शिकार हुए हैं। लंग्स फाइब्रोसिस के कई मरीज मौत के मुंह में चले गए, कई अब भी इलाज के लिए बेहाल हैं। मुश्किल यह है कि लंग्स फाइब्रोसिस का इलाज बेहद महंगा है। इकमो मशीन से इसके इलाज पर प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है और अगर अंतिम विकल्प फेफड़े के प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ी तो डेढ़ करोड़ रुपये का भारी भरकम खर्च होना तय है।  





दूसरी लहर में संक्रमण का असर ऐसा रहा है मरीजों के फेफड़े 80 से 90 प्रतिशत तक खराब हुए हैं। ऐसे कई मरीजों की मौत बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लेकर निजी अस्पतालों में हो चुकी है। इन सबके बीच अब भी इस तरह के मरीज मिल रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक फेफड़ों के खराब होने को विज्ञान की भाषा में लंग्स फाइब्रोसिस कहते हैं। लंग्स फाइब्रोसिस के मरीज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आ रहे हैं। ऐसे मरीजों को डॉक्टर लखनऊ रेफर करने की सलाह दे रहे हैं। वजह यह है कि इन मरीजों के इलाज के लिए इकमो मशीन की जरूरत पड़ती है, जो बीआरडी में नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे मरीजों को बचाने का एक ही और अंतिम विकल्प है, फेफड़ों का प्रत्यारोपण।
 

many patients became victims of lung fibrosis in second wave of corona
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

डॉक्टर की भी लंग्स फाइब्रोसिस से गई थी जान
शहर के रहने वाले 44 साल के एक डॉक्टर कोरोना संक्रमित हुए। परिजन इलाज के लिए दिल्ली के एक बड़े हॉस्पिटल में ले गए। जांच के दौरान पता चला कि उनका फेफड़ा 80 प्रतिशत से अधिक खराब हो चुका है। ऐसे में फेफड़ा बदलना पड़ेगा। इसके लिए परिजन किसी तरह तैयार हुए, लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई। बताया जाता है कि वह भी कई दिनों तक इकमो मशीन के सपोर्ट पर थे।

 

many patients became victims of lung fibrosis in second wave of corona
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

फेफड़ों के प्रत्यारोपण से पहले ही हो गई मौत
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफसर डॉ मानवेंद्र प्रताप सिंह कोरोना से संक्रमित हुए थे। कुछ ही दिनों में उनका फेफड़ा 80 प्रतिशत से अधिक खराब हो गया। लखनऊ में कुछ दिनों तक वह इकमो मशीन पर रहे। इस बीच हैदराबाद में फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए बात चली। एयर एंबुलेंस तक की व्यवस्था हो गई थी, लेकिन मशीन का सपोर्ट हटाने के बाद कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
many patients became victims of lung fibrosis in second wave of corona
डॉ. अश्वनी मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।

डेढ़ करोड़ से ज्यादा है फेफड़े के प्रत्यारोपण का खर्च
डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि फेफड़े के प्रत्यारोपण का खर्च काफी महंगा है। एक प्रत्यारोपण में डेढ़ करोड़ से ज्यादा का खर्च आता है। देश में हैदराबाद के अलावा पीएमएस वेल्लोर में फेफड़े का प्रत्यारोपण होता है। इसके अलावा इकमो मशीन की सुविधा भी पीजीआई में है। ऐसे मरीजों को हर हाल में इकमो मशीन पर रखना पड़ता है।
 

विज्ञापन
many patients became victims of lung fibrosis in second wave of corona
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

काफी महंगा है इकमो मशीन से इलाज
आईएमए के सचिव व चेस्ट फिजिशियन डॉ वीएन अग्रवाल ने बताया कि दूसरी लहर में लंग्स फाइब्रोसिस की चपेट में आने से कई मरीजों की मौत हुई है। कई मरीजों को लखनऊ रेफर किया गया है, जिनका इलाज इकमो मशीन के जरिए हुआ है। यह मशीन मरीज का खून बाहर निकालकर यंत्र के माध्यम से ऑक्सीजेनेशन कर वह खून फिर से शरीर के अंदर पहुंचा देती है। यह एक कृत्रिम प्रक्रिया है। इसमें शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल जाती है। इस मशीन से इलाज के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये प्रतिदिन खर्च करना पड़ता है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed