गोरखपुर शहर के कई होटल भूमिगत जल के साथ हवा की भी सेहत खराब कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर के 131 होटलों को नोटिस जारी करके 15 दिनों में जवाब मांगा है। उचित जवाब नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। होटल पर ताला भी लगाया जा सकता है।
विशेष खबर: आबोहवा खराब कर रहे गोरखपुर शहर के कई होटल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी किया नोटिस
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इसी वजह से उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 131 होटलों को दूसरी बार नोटिस जारी करके 15 दिनों में जवाब मांगा है। बोर्ड के एक अधिकारी का कहना है कि उचित जवाब नहीं मिलने पर संबंधित होटलों पर पेनाल्टी लगाई जाएगी। होटल को बंद भी किया जा सकता है।
दरअसल, किसी भी होटल के संचालन के लिए विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी होता है। भूमिगत जल के इस्तेेमाल के लिए भूगर्भ जल विभाग से और जेनरेटर के इस्तेमाल के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है। हवा को प्रदूषण से बचाने के लिए सभी होटलों को डीजल जेनरेटर (डीजी) सेट लगाना जरूरी होता है।
शासन स्तर पर गठित है कमेटी
होटलों में वायु और भूमिगत जल की गुणवत्ता बरकरार रखने संबंधी विभिन्न मानकों की जांच के लिए शासन स्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसमें केंद्रीय भूगर्भ जल विभाग के डॉ. फकरे आलम, जिला प्रशासन की ओर से एसीएम विनय पांडेय और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक सहायक अयोध्या प्रसाद शामिल हैं। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है।
भूमिगत जल को प्रदूषित करने और बिना अनुमति इस्तेमाल करने पर भूगर्भ जल विभाग पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है। वहीं, भूमिगत जल को प्रदूषित करने पर दो साल तक की सजा हो सकती है। होटलों के कमरों के हिसाब से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का मुआवजा वसूल सकता है।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी पंकज यादव ने कहा कि भूमिगत जल को प्रदूषित करने और डीजल जनरेटर सेट संबंधी विभिन्न मानकों के संबंध में शहर के 131 होटलों को नोटिस दिया गया है। 15 दिनों में जवाब मांगा गया है। उचित जवाब नहीं मिलने पर संबंधित होटलों पर पेनाल्टी लगाई जाएगी। होटल को बंद भी किया जा सकता है।